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Bareilly News: पार्लर ही नहीं, ओटी में भी निखर रही सुंदरता, हाइमनोप्लास्टी घटी

Tue, 30 Jun 2026 05:17 PM IST
Mukesh Kumar अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली शहर में हर माह 20-25 कॉस्मेटिक प्लास्टिक सर्जरी हो रही हैं। वहीं हाइमनोप्लास्टी के मामले 35-40 से घटकर एक-दो रह गए हैं। समाजशास्त्री इसे बढ़ती जागरूकता का परिणाम मानते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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सौंदर्य की चाहत पार्लरों से निकलकर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) तक पहुंच गई है। बरेली में हर माह कॉस्मेटिक प्लास्टिक सर्जरी के 20-25 सामने आ रहे हैं। इसके उलट हाइमनोप्लास्टी में गिरावट दर्ज हुई है। एक दशक पहले हर साल हाइमनोप्लास्टी के 35-40 मामले सामने आते थे, अब एक-दो युवतियां ही ओटी तक पहुंच रही हैं। समाजशास्त्री इसे लोगों की बदलती सोच और बढ़ती जागरूकता से  जोड़कर देख रहे हैं।

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प्लास्टिक सर्जन के मुताबिक आठ दस वर्ष पहले कई युवतियां सामाजिक दबाव, विवाह से जुड़ी धारणाओं  व्यक्तिगत वजह से हाइमनोप्लास्टी कराती थीं। वर्ष 2020 के बाद यह आंकड़ा घटने लगा। अब साल में एक दो सर्जरी ही होती है। वर्ष 2026 में  अब तक सिर्फ एक ही सर्जरी हुई है। इसके उलट कॉस्मेटिक प्लास्टिक सर्जरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्लास्टिक सर्जन डॉ. कौशल कुमार के मुताबिक नाक की बनावट, चेहरे की असमानता, जन्मजात विकृति आदि को ठीक कराने, गाइनेकोमेस्टिया (पुरुषों में बढ़े स्तन) से निजात, हेयर ट्रांसप्लांट, चेहरे की झुर्रियां हटवाने समेत सौंदर्य संबंधी अन्य प्रक्रिया के लिए बच्चे-युवा और बुजुर्ग भी ओटी पहुंच रहे हैं। 

जानिए, क्या है हाइमनोप्लास्टी
सर्जिकल प्रक्रिया से हाइमन का पुनर्निर्माण होता है। यह वैकल्पिक सर्जरी है, जिसे व्यक्तिगत वजहों से कराया जाता है। स्वास्थ्य से इसका सीधा संबंध नहीं है। हाइमन एक पतली झिल्ली होती है, जिसे महिलाओं के कौमार्य से जोड़कर देखा जाता है।

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ये होती है कॉस्मेटिक सर्जरी 
इसके जरिये शरीर या चेहरे का सौंदर्य निखारते हैं। इसके तहत राइनोप्लास्टी (नाक की सर्जरी), गाइनेकोमेस्टिया, फेस कॉन्टूरिंग, स्केयर्स करेक्शन, हेयर ट्रांसप्लांट, एंटी एजिंग व अन्य सर्जरी होती हैं।

केस- 1
होंठ को मिला मनचाहा आकार

ग्रीन पार्क निवासी 24 वर्षीय युवती को होंठ का आकार ठीक नहीं लगता था। सहेलियां मजाक बनाती थीं। परिजन से समस्या बताई तो वे प्लास्टिक सर्जरी के लिए पहुंचे। सर्जरी के बाद मनचाहा आकार मिला। लोगों ने इसकी तारीफ की और सुझाव भी मांगा।

केस- 2
सनसिटी विस्तार निवासी 66 वर्षीय बुजुर्ग ने लटकती गले और चेहरे की त्वचा में कसावट के लिए लिए प्लास्टिक सर्जन से संपर्क किया। एंटी एजिंग सर्जरी से अनावश्यक त्वचा का हिस्सा हटाकर सही किया गया। इससे उम्र का असर चेहरे पर कम नजर आ रहा है।
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जैविक तथ्य चारित्रिक आकलन का आधार नहीं
शौर्य वेलफेयर सोसायटी की सचिव डॉ. बिंदिया सक्सेना ने कहा कि हाइमनोप्लास्टी में गिरावट चिकित्सा क्षेत्र का बदलाव नहीं बल्कि रूढ़ियों, अवैज्ञानिक परंपराओं के प्रति नई पीढ़ी की सोच का आईना है। युवा समझ रहे हैं कि महिला के चरित्र, व्यक्तित्व का आकलन जैविक तथ्य के आधार पर नहीं होना चाहिए। सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, कैमरा संस्कृति, पेशेवर प्रतिस्पर्धा से लोगों में जागरूकता बढ़ी है।

लिव-इन के दौर में टूट रहीं सामाजिक वर्जनाएं
बरेली कॉलेज समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत कौर आहूजा के मुताबिक, डिजिटल युग में किसी विषय का ज्ञान एक क्लिक पर है। घूंघट से निकलकर महिलाएं लिव-इन तक पहुंच गई हैं। पहले विवाह और सामाजिक स्वीकार्यता का दबाव महिलाओं पर था। नई पीढ़ी व्यक्तिगत निर्णय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को महत्व दे रही है। कॉस्मेटिक सर्जरी का बढ़ना चिकित्सा तकनीकों के प्रयोग की स्वीकार्यता को भी दर्शाता है।
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