दोनों मामलों में ब्याज समेत कुल 114.13 करोड़ रुपये बीडीए को लारा में जमा करना था। बीडीए ने अब तक एक रुपया भी जमा नहीं किया है। दोनों मामलों में रोज 1.22 लाख रुपये का ब्याज चढ़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तक दी चुनौती, हर जगह मिली मात
बीडीए ने लारा के फैसले को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी, लेकिन हर जगह उसे मात मिली। अब इन किसानों ने लारा के पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन कराने के संबंध में बीडीए के विरुद्ध फिर वाद दाखिल किया है। चंद्रपुर बिचपुरी के ओम प्रकाश ने बताया कि उनके ही गांव के सुरेश और श्रवण का मामला भी सुप्रीम कोर्ट से निस्तारित हो चुका है, मगर बीडीए उन्हें मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है।
7500 के बजाय 165.51 रुपये की दर से दिया मुआवजा
किसान ओम प्रकाश और राम प्रकाश ने बताया कि वर्ष 2004 में उनकी जमीन का अधिग्रहण भूमि अर्जन अधिनियम-1894 के तहत बीडीए ने किया था। अप्रैल 2016 में अवार्ड घोषित किया। चंद्रपुर बिचपुरी के साथ ही अहरौला, डोहरिया, मोहनपुर उर्फ रामनगर की भूमि का भी बीडीए ने रामगंगानगर आवासीय योजना के लिए अधिग्रहण किया था।
उक्त भूमि का सर्किल रेट 7500 रुपये प्रति वर्गमीटर निश्चित है। बीडीए ने वर्ष 2004 से पूर्व तीन वर्ष के अंदर हुए 74 बैनामों में से केवल 11 के मूल्य का औसत निकालकर उसी के आधार पर प्रतिकर की धनराशि 165.51 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित कर अवार्ड घोषित कर दिया। यह किसानों के लिए न्यायसंगत नहीं है।