बीडीए ने सिटी मजिस्ट्रेट और तीन थानों की पुलिस फोर्स के साथ बिहारमान नगला में 20 साल पुराने अवैध कब्जेदारों को हटाकर 20 आवास कब्जा मुक्त करा लिए। इनकी अनुमानित कीमत सवा दो सौ करोड़ बताई जा रही है। अभियान के दौरान बीडीए टीम की कब्जेदारों के परिवारों से तीखी नोकझोंक हुई। महिलाओं ने सामान निकालने का विरोध किया लेकिन फोर्स के सामने उनकी एक नहीं चली। पुलिस ने सख्ती दिखाकर कब्जेदारों का सामान बाहर निकलवा दिया।
बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार पांडेय ने तीन दिवसीय अतिक्रमण अभियान की रूपरेखा बनाकर प्रशासन और पुलिस फोर्स की मदद मांगी थी। प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद बृहस्पतिवार को बीडीए सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अपर सचिव अनिल कुमार मिश्रा और सिटी मजिस्ट्रेट यूपी सिंह की अगुवाई में बीडीए की टीम प्रेमनगर, कैंट और इज्जतनगर थाने की फोर्स के साथ बिहारमान नगला में भाऊराव देवरस योजना में बने मकानों से कब्जा हटाने पहुंची। करीब दो दशक पुरानी इस योजना में बीडीए ने 25 आवास बनाए थे। इनमें से बीस पर दबंगों ने जबरन कब्जा कर लिया और उनमें रहने लगे। हालांकि बीडीए ने कब्जेदारों को ऑफर दिया था कि वह आवासों की कीमत चुकाकर उनकी अपने नाम रजिस्ट्री करा लें, लेकिन जब कब्जेदारों ने बीडीए के ऑफर को नहीं माना तो उन्हें 15 दिन के अंदर सामान निकालकर मकान छोड़ने की चेतावनी दी गई थी। बृहस्पतिवार को फोर्स की मौजूदगी में दोपहर 11:30 से दो बजे तक चले अभियान में कब्जेदारों का सामान आवासों से बाहर निकालकर बीडीए ने उनमें अपना ताला लगा दिया। इस दौरान कब्जेदारों की बीडीए टीम से नोकझोंक भी हुई। खासतौर से महिलाओं ने आवासों से बाहर करने का विरोध किया। अभियान में एक्सईएन बीएम गोयल, मोहनलाल के अलावा एई और जेई शामिल थे। अभियान दो दिन तक चलेगा।