'एक धर्म की संस्कृति थोपने की साजिश'
उन्होंने कहा कि मुल्क के तमाम नागरिकों ने गणतंत्र दिवस मनाकर यह संदेश दिया है कि हमें संविधान के तहत बराबरी का अधिकार मिला हुआ है। हम सभी को इस पर गर्व है। जब संविधान में सभी समान हैं तो यह तथाकथित संहिता लागू करने की क्या जरूरत है, जो असल में एक धर्म की संस्कृति को बाकी सभी मजहबों पर थोपने की साजिश से ज़्यादा कुछ भी नहीं है।
मौलाना ने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा में ही नहीं बल्कि संसद में सभी विपक्षी दलों को इस फैसले का खुलकर विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षा दलों को आधिकारिक बयान जारी कर बताना चाहिए कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने पर उनका क्या रुख है। उन्होंने कहा कि जहां तक मुसलमानों का सवाल है तो मुल्क का क़ानून हमें भी अपने मजहब और कल्चर को अपनाने और निभाने की इजाज़त देता है। यह अधिकार कोई भी नेता या पार्टी नहीं छीन सकती। कहा कि शरीयत के मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रजा कमेटी इस मुद्दे पर कानूनी राय भी ले रही है और इस निर्णय का विरोध किया जाएगा।