22 जून की सुबह पीलीभीत बाईपास पर प्लॉट पर कब्जे को लेकर प्रॉपर्टी डीलर राजीव राना और आदित्य उपाध्याय के गुटों में जमकर फायरिंग हुई थी। बीच सड़क पर खुलेआम फायरिंग की घटना से शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल उठे थे। शासन ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की थी। पुलिस ने आदित्य उपाध्याय के चौकीदार रोहित की ओर से रिपोर्ट दर्ज की थी। इसमें भाजपा के पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल, उनके नजदीकी प्रॉपर्टी डीलर राजीव राणा समेत 12 को नामजद किया गया, जबकि 150 हमलावर अज्ञात हैं। वहीं दरोगा राजीव प्रकाश की ओर से दर्ज एफआईआर में आठ नामजद हैं। इस मामले में अब तक 21 आरोपियों को जेल भेजा चुका है।
मुख्य आरोपी राजीव राना फरार चल रहा था। आरोपी राजीव राना की ओर से कोर्ट में सरेंडर अर्जी दी गई थी। इस पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 29 जून की तारीख तय की है। लेकिन इससे पहले ही पुलिस- प्रशासन के साथ बीडीए की टीम बुलडोजर लेकर गुरुवार को सुबह उसके होटल और मकान के बाहर पहुंच गई। उसके होटल के बाहरी हिस्से को ढहा दिया गया। मकान और दफ्तर पर भी बुलडोजर चला है। कार्रवाई के बीच पहुंची राना की पत्नी और बेटी होटल और मकान टूटता देख रो पड़ीं। राना की बेटी ने कहा कि घटना के वक्त उसके पिता वहां नहीं थे। सबसे पहले आदित्य उपाध्याय ने गोली ने चलाई थी। हम नेतागीरी के शिकार हुए हैं। हमें इंसाफ चाहिए।