उन्होंने बताया कि बेटी के भविष्य को देखकर वह डॉ. मधुर की बातों में आ गए। छह मई 2019 को डॉ. मधुर का असिस्टेंट बताकर कौशल नाम का व्यक्ति डीपीएम इंस्टीट्यूट, एयरपोर्ट पर उनसे मिला। सरकारी सीट पर एडमिशन कराने की बात कहकर उसने पांच लाख रुपये में बात तय की और उनसे ढाई लाख रुपये का चेक बतौर एडवांस ले लिया। यह चेक डॉ. कौशल किशोर शर्मा के अकाउंट में लगाकर 14 मई, 2019 को कैश करा लिया गया।
उन्होंने बताया कि इसी बीच उनकी बेटी का एडमिशन अपने आप ही एमबीबीएस में सरकारी सीट पर हो गया। इसके बाद उन्होंने डॉ. मधुर से संपर्क करके रुपये लौटाने को कहा तो उसने रुपये न देने की बात कही। डॉ. कौशल किशोर से संपर्क किया तो वह रुपये लौटाने में बहानेबाजी करने लगा। सबूत के तौर पर उसके अकाउंट में भुगतान हुआ चेक और बैंक से आया मेसेज उनके पास मौजूद है। डॉ. विकास की शिकायत के बाद बारादरी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है।