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बरेली की आकृति, ज्ञानेंद्र और गोपी को भी मिली कामयाबी

Wed, 11 May 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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अाकृ‌त‌ि सागर
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मंगलवार को आए यूपीएससी के रिजल्ट में बरेली के तीन होनहारों ने कामयाबी का परचम लहराया है। रामवाटिका में रहने वाले चंद्रसेन सागर की तीसरी बेटी आकृति सागर ने सिविल सेवा परीक्षा में 239वीं रैंक हासिल की है। आकृति की एक बहन आईआरएस हैं और दूसरी आईएएस। चंद्रसेन को तीसरी बेटी के सिविल सेवा परीक्षा पास करने पर रिश्तेदार घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं। चंद्रसेन सागर के परिवार के लिए यह बहुत बड़ी खुशी है, क्योंकि अब उनकी तीनों बेटियां सिविल सेवा में होंगी।
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नवाबगंज के हिमकरपुर चमरौआ गांव में रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक राम गुलाम गंगवार के बेटे ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने 314वीं रैंक हासिल की है। ज्ञानेंद्र इस समय पर एनटीपीसी में इंजीनियर हैं। ज्ञानेंद्र का पूरा परिवार गांव में ही रहता है। आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. बी गोपी ने यूपीएससी में 343वीं रैंक पाई है। गोपी एमवीएससी कर रहे हैं।
आईवीआरआई के एनिमल जेनेटिक्स में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रणवीर सिंह के छात्र डॉ. बी गोपी चेन्नई के रहने वाले हैं। उनके ही एक और छात्र रहे कर्नाटक के डॉ. सुखुपुत्रा एनओ ने 917वीं रैंक हासिल की है। सुखपुत्रा पांच-छह साल पहले आईवीआरआई एमवीएससी पास कर जा चुके हैं। 
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अब तो हो गया यह आईएएस परिवार
चंद्रसेन सागर की तीसरी बेटी आकृति भी बनी आईएएस
एक बेटी आईआरएस और एक आईएएस पहले से है
रामवाटिका में रहने वाले चंद्रसेन सागर की तीसरी बेटी आकृति सागर ने भी यूपीएससी क्वालीफाई कर लिया है। आकृति को 239वीं रैंक मिली है। अब यह आईएएस परिवार हो गया है। पूर्व ब्लाक प्रमुख चंद्रसेन सागर की सबसे बड़ी बेटी अर्जित आईआरएस है, दूसरी बेटी अर्पित आईएएस है। अब तीसरी बेटी भी आकृति भी आईएएस हो गई। बाकी की दो बेटियां फैशन डिजाइनर हैं और एक बेटी है, वह अभी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ रहा है। आकृति 24 साल की उम्र में ही आईएएस बन गई। आकृति ने सेंट मारिया गोरेटी से 12वीं टॉप किया। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। ग्रेजुएशन 2013 में पूरा हो गया। तब से वह तैयारी कर रही है। पिछले साल इंटरव्यू में नहीं हो पाया था। अगले ही साल आकृति ने अपने परिवार को यह खुशी दे दी। आकृति शुरू से ही आईएएस बनना चाहती थी, इसलिए उसने ग्रेजुएशन करने के बाद सीधे तैयारी शुरू की, इसलिए उसे इतनी कम उम्र में यह कामयाबी मिल गई। चंद्रसेन सागर ने कहा कि राजनीति में होते हुए भी वह कोशिश करते हैं कि किसी का बुरा न हो। शायद, उनकी अच्छाई का फल ही उनकी बेटियों को मिल रहा है। यूपीएससी का रिजल्ट आने के बाद बधाई देने वालों का घंटी लगातार बजती रही। रिश्तेदारों से लेकर दोस्त और कॉलोनी वाले भी बधाई देने के लिए फोन करते रहे। 

बेटियों को आईएएस बनाने में मां की भूमिका
बेटियों से ज्यादा उनकी पढ़ाई की फिक्र मां मीना सागर को रहती है। चंद्रसेन सागर की पत्नी मीना सागर खुद बेटियों के साथ परीक्षा के दौरान रहती हैं, ताकि उन्हें पढ़ाई के दौरान कोई तकलीफ न हो। खाने-पीने में बेटियों को कोई समस्या न हो। तीनों बेटियों को आईएएस बनाने में मां का बहुत बड़ा योगदान है। वह अपनी सभी बेटियों का बहुत ख्याल रखती हैं। मां बेटियों के साथ रहती हैं और पिता चंद्र सागर अकेले बरेली में रहकर बेटियों को प्रोत्साहित करते हैं।  

पिता ने बेटियों पर अपने सपनों का बोझ नहीं डाला
चंद्रसेन सागर ने अपनी बेटियों पर कभी सपनों का बोझ नहीं डाला। उन्होंने बताया कि उनकी बेटियां जिस क्षेत्र कॅरिअर बनाना चाहती थीं, उन्होंने पूरा साथ दिया। कभी अपनी इच्छा उनके ऊपर नहीं थोपी। चंद्रसेन सागर ने अपनी दो फैशन डिजाइनर बेटियों से कभी यह नहीं कहा कि वे भी सिविल सर्विसेस की तैयारी करें। उन्होंने कहा कि बेटियां जो बनना चाहती थीं, वह बनीं, उनको सपनों को पूरा करने में साथ दिया।
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