जरी-जरदोजी कारोबारी शाकिर अली ने कहा कि हमारी लंबे समय से मांग है कि सरकार की ओर से इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बजट जारी किया जाए। सरकार की ओर से ऐसा कोई केंद्र खुलना चाहिए, जिसमें कारीगरों के लिए नए-नए डिजाइन उपलब्ध हों। वर्तमान में डिजाइनर के तैयार डिजाइन बहुत महंगे होते हैं, जो आम करीगरों की पहुंच से दूर हैं।
जरी-जरदोजी कारोबारी हिमकत अली ने कहा कि बरेली की वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी जरी-जरदोजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार से हमें बहुत उम्मीद है। मगर, इसके लिए स्थानीय स्तर पर ध्यान आकृष्ट कराना होगा। हमें उम्मीद है कि इस चुनाव में लोग हमारी बात समझेंगे और इस क्षेत्र के लिए काम करेंगे।
इस नियम में बदलाव की मांग
बरेली सराफ एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में 50 हजार रुपये से ऊपर की सोने की खरीद पर आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है, जबकि 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 70 हजार रुपये है। इस नियम में बदलाव के लिए हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं। ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं है।
बेंत फर्नीचर कारोबारी नत्थू हुसैन ने कहा कि बेंत के फर्नीचर को चीन सहित अन्य देशों से भी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ऐसे में बेंत उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी की भी जरूरत है। इसके लिए हम लंबे समय से सरकार से मांग भी कर रहे हैं।
बरेली सराफ एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि सरकार की कुछ योजनाएं आती हैं, लेकिन उनका लाभ चुनिंदा लोगों को ही मिलता है। अगर स्थानीय स्तर पर पहल हो व सुनारी उद्योग के लिए एक नीति बने तो यह उद्योग नए कलेवर में आ सकता है।