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Bareilly News: एमआर टीकाकरण में पिछड़ा बरेली, 38 फीसदी बच्चे ही हुए प्रतिरक्षित

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बरेली। खसरा और रुबेला बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए 16 फरवरी से शुरू हुई एमआर टीकाकरण मुहिम में अंतिम तिथि 27 फरवरी तक महज 38 फीसदी टीकाकरण हुआ है। विभागीय अफसरों ने स्कूलों में चल रही परीक्षा और अभिभावकों की सहमति न मिलने को इसकी वजह बताया है।
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स्कूल आधारित टीकाकरण की रिपोर्ट पर गौर करें तो 3,17,849 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य था। इसके लिए विभाग ने 2,999 टीकाकरण सत्र आयोजन का लक्ष्य रखा था। 2,936 सत्र आयोजित हुए लेकिन कई सत्रों में स्वास्थ्यकर्मी बच्चों का इंतजार करते रहे। आशा कार्यकर्ता, एएनएम ने क्षेत्रवार पांच से 10 वर्ष तक के स्कूली बच्चों के परिजन से भी संपर्क किया।
लक्ष्य के सापेक्ष 1,22,236 बच्चों को टीका लगा। 1,95,613 बच्चे टीकाकरण से छूटे। डीआईओ डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, कई स्कूलों में परीक्षा के चलते बच्चों को टीका लगाने पर परिजन सहमत नहीं हुए।
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वहीं, परीक्षा के दौरान कई स्कूलों ने अभिभावकों से सहमति पत्र भी जारी किया। बताया जाता है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों में उपस्थित 90 फीसदी बच्चे प्रतिरक्षित हुए और कई निजी स्कूलों में सबसे कम टीकाकरण हुआ। कुछ निजी स्कूलाें ने सहयोग से साफ इन्कार भी कर दिया था।

टीकाकरण में फरीदपुर अव्वल, बिथरी चैनपुर फिसड्डी
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार फरीदपुर में सर्वाधिक 58 फीसदी एमआर टीकाकरण हुआ। क्रमवार कुआंडांडा में 57, बहेड़ी में 48, मीरगंज में 46, फतेहगंज में 45, भोजीपुरा में 42, क्यारा में 41, रामनगर, भमोरा, मझगवां में 38, दलेलनगर में 37, शेरगढ़, नवाबगंज में 33, मुडिया नवीबक्श में 31, बिथरी चैनपुर में 14 फीसदी टीकाकरण लक्ष्य हासिल हो सका।

एएनएम को रोजाना सौ बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य
प्रत्येक एएनएम को रोजाना सौ से ज्यादा बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य था। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2024 में मीजल्स के चार और रूबेला के आठ मरीज, 2025 में मीजल्स के 14 और रूबेला के तीन मरीज, 2026 में अब तक मीजल्स के चार और रूबेला के दो मरीज मिले हैं। इलाज जारी है।
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