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Bareilly: फौजी का बेटा भागकर मुंबई पहुंचा, घर में सेना जैसे अनुशासन से था परेशान, जीआरपी को पांच दिन बाद मिला ठिकाना

Mon, 11 Jul 2022 01:25 PM IST
अनुराग सक्सेना संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली।

सार

बरामद होने के बाद युवक ने बताया कि वह पिता की सख्त पाबंदियों से परेशान था। वह हर समय पढ़ाई के लिए बोलते हैं। घर से बाहर निकलने की भी मनाही है। छुट्टी पर घर आने पर उसके साथ मारपीट करने के साथ धमकाते भी हैं।
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घर के अनुशासन से परेशान छात्र घर से भागकर मुंबई पहुंचा - फोटो : अमर उजाला- फाइल फोटो
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विस्तार
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फौजी पिता के घर में सेना जैसे सख्त अनुशासन और तमाम पाबंदियों से 12वीं की पढ़ाई कर चुका बेटा इतना परेशान हो गया कि भागकर मुंबई पहुंच गया। सिटी स्टेशन के थाना जीआरपी पर चार जुलाई को उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। पांच दिन बाद जीआरपी उसका पता लगा पाई। सोमवार को मुंबई से लाने के बाद उसे उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।

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इज्जतनगर के एयरफोर्स गेट के पास रहने वाला एक युवक त्रिवेणी एक्सप्रेस से लखनऊ परीक्षा देने के लिए गया था। रास्ते से ही वह लापता हो गया। चार जुलाई को उसके नाना ने सिटी स्टेशन पर गुमशुदगी दर्ज कराई, इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। दो दिन पहले परिवार वालों के मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से फोन आया और फिर कट गया। इस नंबर को ट्रेस किया गया तो वह मुंबई का निकला। इसके बाद मुंबई पुलिस से मामले की जानकारी दी गई।

युवक के मुंबई में होने की पुष्टि के बाद एसपी रेलवे अपर्णा गुप्ता के आदेश पर थाना प्रभारी सिटी स्टेशन पिंकी रानी टीम के साथ मुंबई पहुंची और वहां युवक को बरामद कर लिया। बरेली लाए गए युवक ने बताया कि वह 12वीं पास कर चुका है और आईआईटी की तैयारी कर रहा है। उसके पिता आर्मी में हैं, मां भी आर्मी स्कूल में शिक्षक है।

उसने बताया कि वह पिता की सख्त पाबंदियों से परेशान था। वह हर समय पढ़ाई के लिए बोलते हैं। घर से बाहर निकलने की भी मनाही है। छुट्टी पर घर आने पर उसके साथ मारपीट करने के साथ धमकाते भी हैं। इसी से परेशान होकर वह पहले रानीखेत गया, फिर मुंबई चला गया। युवक ने बताया कि एक बार पहले भी वह घर से भाग चुका है। तब पुलिस ने उसे नागपुर से बरामद किया था।

अनजान शख्स ने डाला चक्कर में

युवक के पास की-पेड वाला मोबाइल था जिसे उसने ट्रेन में ही छोड़ दिया था। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद जीआरपी ने सिटी स्टेशन से लेकर लखनऊ तक तमाम सीसीटीवी कैमरे चेक कराए पर कुछ हाथ नहीं लगा। युवक के मोबाइल पर फोन करने पर पता चला कि वह किसी और के पास है जो कभी हरदोई तो कभी शाहजहांपुर का पता बता रहा था। मोबाइल पर उसकी लोकेशन लखनऊ में ट्रेस हो रही थी।
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दोस्तों से कहा- परेशान हो गया हूं

जीआरपी ने युवक के मोबाइल की चैट की भी जांच की। इस दौरान पता चला कि युवक ने अपने दोस्तों को भी चैट कर बता दिया था कि वह बहुत परेशान हो गया है। अब वह कहीं दूर चला जाएगा। घर पर नहीं रुकेगा।

इस तरह के मामले अब आम बात है। आर्मी के डिसिप्लिन मैनर में अग्रेशन है। अग्रेसिव करेक्टर की वजह से ही ऐसे मामले होते है। इसीलिए बच्चों के पास दादा-दादी या नाना-नानी का होना जरूरी है ताकि उनसे वे भावनात्मक तौर पर जुड़ सकें। वैसे भी बच्चे को सजा देने के बाद बातचीत कर प्यार से समझाना भी जरूरी है। बच्चों के लिए हर दिन भावनात्मक माहौल घट रहा है। बच्चे कोई कदम उठाते वक्त आगे के जीवन के बारे में कुछ नहीं सोचते। बच्चों के प्रति थोड़ा नर्म रहना जरूरी। स्कूल के साथ घर पर समय-समय पर उनकी काउंसलिंग भी होनी चाहिए।
- डॉ. हेमा खन्ना, मनोवैज्ञानिक
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