बेटी का टीकाकरण कराने के बाद जानकारी साझा करतीं मुस्कान
- फोटो : डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनशॉट
बच्ची को हुआ खसरा तो समझे टीके का महत्व
बाकरगंज की रहने वाली मुस्कान ने अपनी बेटी को एक भी टीका नहीं लगवाया था। आशा कार्यकर्ता और एएनएम के समझाने पर भी वह तैयार नहीं हो रही थीं। बल्कि टीके लगने से बुखार आने, पति की मजदूरी का काम प्रभावित होने समेत कई बहाने बना रही थीं। बेटी खसरा रोग की चपेट में आई तो उन्हें बताया गया कि अगर टीका लगा होता तो बच्ची बीमार न होती।
अब दूसरों को भी टीका लगवा रही हैं नीलम
बाकरगंज की रहने वाली नीलम ने बेटी को एक भी टीका नहीं लगाया था। उनका परिवार टीकाकरण के विरोध में था। स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे थे। मगर बेटी की तबीयत बिगड़ी तो उन्हें टीकाकरण की अहमियत समझ में आई। विरोध को परे रख केंद्र पर टीकाकरण कराने पहुंचीं।
बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
डॉ. प्रशांत के मुताबिक, बच्चों को वैक्सीन लगने के बाद बुखार का होना बीमारी नहीं बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढ़ना होता है। नियमित टीकाकरण से जापानी इंसेफलाइटिस, टीबी, निमोनिया, रतौंधी, रोटा वायरस, पोलियो, पीलिया, काली खांसी, गलघोंटू, टेटनस, खसरा, हीमोफिलिया इंफ्लूएंजा का खतरा टलता है। इनसे बचाव के लिए टीके शून्य से पांच वर्ष की आयु के बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क लगते हैं।