शराब की दुकान पर सस्ते में खोज लेते थे खाताधारक
साइबर क्राइम थाना पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि विक्की के साथी शराब की दुकानों पर खड़े होकर नशे के आदी लोगों से मेलजोल बढ़ाते थे। उन्हें नशा कराकर और कमीशन का झांसा देते थे। आधार कार्ड व अन्य आईडी लेकर उनके खाते खुलवाते थे। उन्हीं लोगों की आईडी से सिम खरीदते थे। फिर खाता खुलने के बाद उसकी पासबुक, डेबिट कार्ड व खाते से जुड़ा सिम कार्ड जामताड़ा में बैठे साइबर ठग विशाल और उसके साथियों तक पहुंचाते थे।
जामताड़ा के साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए करते थे। फिर क्यूआर कोड, डेबिट कार्ड और यूपीआई का इस्तेमाल कर खातों से रकम निकाल लेते थे। शिकायत होने पर पुलिस जिस खाते को फ्रीज करती थी, साइबर ठग उससे संबंधित सभी दस्तावेज व सिम नष्ट कर देते थे। इसलिए पुलिस असली साइबर ठगों तक पहुंच ही नहीं पाती थी। अब विक्की से पूछताछ और उसके मोबाइल फोन की जांच में कई खातों की जानकारी मिली है, जिनकी जांच की जा रही है।
यूपी का जामताड़ा बना था धंतिया, साइबर ठगों ने बदनाम किया था गांव
फतेहगंज पश्चिमी के गांव धंतिया की पहचान कुछ साल पहले तक यूपी के जामताड़ा के रूप होती थी। धंतिया निवासी शातिरों और हवाला धंधेबाजों ने देश के विभिन्न राज्यों में गांव को बदनामी का दाग दिया था। अब धंतिया के शातिर आसपास के इलाके में फैल गए हैं। ये लोग बड़े पैमाने पर सीधे-सादे लोगों के खाते परसाखेड़ा और सीबीगंज क्षेत्र के बैंकों में खुलवाकर उनका इस्तेमाल अवैध लेनदेन में करते हैं। शहर में बड़े पैमाने पर ऐसे खाते संचालित हो रहे हैं, जिनका संचालन दूसरे संदिग्ध लोगों के पास है।
साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि विक्की साहू के चारों साथियों की तलाश की जा रही है। उनके नेपाल भागने की चर्चा है। उनके स्थानीय नेटवर्क की जानकारी की जा रही है। जल्दी ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। सही इनपुट मिला तो टीम जामताड़ा भी जा सकती है।