शादाब की मकान मालकिन ने बताया दिया कि उनसे घटना देखी है, मौके पर शादाब के अलावा अन्य कोई नहीं था। कोर्ट ने शादाब को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। बाकी आरोपियों को बरी कर दिया।
पीड़िता के नाबालिग होने का साक्ष्य नहीं दे सका अभियोजन पक्ष
मामले में विवेचक ने सभी पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट भी लगाया गया था, लेकिन कोर्ट में अभियोजन पक्ष पीड़िता के नाबालिग होने के संबंध में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका। वारदात के समय चार अन्य आरोपियों की मौके पर मौजूदगी साबित करने में भी अभियोजन पक्ष नाकाम रहा। ऐसे में कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट से सभी को बरी कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि विवेचक ने सुने-सुनाए बयानों के आधार पर चार्जशीट दाखिल कर दी।
पॉक्सो एक्ट में दोषी को 20 साल की कैद, 32 हजार रुपये जुर्माना
पॉक्सो एक्ट के दोषी को स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट ने 20 साल की कैद और 32 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी के माता-पिता समेत चार अन्य को भी छह-छह माह की कैद और चार-चार हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषियों को अतिरिक्त समय तक कारागार में रहना होगा।
बिशारतगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि परिचित साजिद 31 मई 2021 को उसकी नाबालिग बेटी को अगवा कर ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया। एक जून की रात आठ बजे वह और उसकी पत्नी साजिद के घर शिकायत करने गए तो उसके पिता और परिजनों ने जान से मारने की धमकी दी। वादी ने साजिद समेत उसके पिता साबिर, मां रजिया बी, भाई जाकिर, राशिद को नामजद किया था। पुलिस ने जांच के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से में 13 गवाह व साक्ष्य पेश किए गए। कोर्ट ने साजिद को पॉक्सो एक्ट का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। उसके पिता-पिता और दो भाइयों को भारतीय दंड संहिता की धारा 504, 506 व 149 के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।