अफसर और इंजीनियर का नाम भी चर्चा में रहा
चंद्रगुप्तपुरम निवासी रामकिशोर और मॉडल टाउन निवासी संदीप सिंह उर्फ चंदीप भी कंपनी में शामिल हुए। इन सभी ने मिलकर लोगों से निवेश कराया। कंपनी चर्चा में आई तो कई रसूखदार लोग भी साझीदार बन गए। कई सरकारी अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों और पत्नियों के जरिये राजेश की कंपनी में अपनी काली कमाई लगा दी। इनमें एक सरकारी क्षेत्र के बड़े बैंक का अधिकारी और निर्माण कार्य से जुड़े विभाग के अभियंता का नाम चर्चा में रहा। अभियंता ने अपनी पत्नी के नाम से पार्टनरशिप की थी। जब पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो पार्टनर बच निकले, लेकिन राजेश मौर्य व उसके परिवार पर शिकंजा कसता गया।
आरोपी के पास से बरामद हुए थे सिर्फ 1.96 लाख
शहरवासियों से तीन सौ करोड़ रुपये की ठगी कर भागने वाले राजेश को जब गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया तो निवेशकों को लगा कि शायद उनके रुपये मिल जाएंगे। काफी दिनों की पूछताछ के बाद भी पुलिस राजेश से महज 1.96 लाख रुपये ही बरामद कर सकी। पुलिस ने उसके 21 बैंक खातों में दस लाख रुपये सीज कर दिए थे। कंपनी की आठ लग्जरी कारें भी पुलिस ने सीज कर दी थी। जब राजेश भागा था तो उसने योजना के तहत खातों से करोड़ों रुपये निकाल लिए थे। राजेश ने ये रुपये कहां निवेश किए, यह सवाल आज भी कायम है।
अब भी रकम वापसी की राह देख रहे निवेशक
श्री गंगा इंफ्रासिटी में निवेश कर कई लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा दी। जब राजेश मौर्य को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था, तभी राजेश ने कंपनी के ही कुछ लोगों पर रकम हड़पने और कंपनी का बंटाधार करने का आरोप लगाया था। राजेश ने दावा किया था कि अगर उसकी कुछ मदद की जाए तो वह निवेशकों का रुपया लौटा सकता है, लेकिन निवेशकों ने राजेश के ऊपर दोबारा भरोसा करने से मना कर दिया था। कई निवेशक आज भी राजेश के खिलाफ चेक बाउंस का केस इस उम्मीद में लड़ रहे हैं कि शायद उनकी रकम वापस मिल जाए।