मामला संज्ञान में आने के बाद प्राचार्य ने बैठाई जांच
बरेली। एक महाविद्यालय में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर का बरेली कॉलेज में ट्रांसफर कराने के नाम पर लिपिक ने उनसे 1.30 लाख रुपये ले लिए। रुपये देने के बाद भी स्थानांतरण नहीं हुआ तो प्रोफेसर के सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी पिता ने इसकी शिकायत की। इस पर लिपिक ने 90 हजार रुपये वापस कर दिए, लेकिन बाकी रकम अब तक नहीं दी है। इस प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद प्राचार्य ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच शुरू करा दी है।
पीलीभीत के बीसलपुर में रहने वाले सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक सोमपाल सिंह के पुत्र असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर एक महाविद्यालय में कार्यरत हैं। वह अपना स्थानांतरण बरेली कॉलेज में करना चाहते थे। बरेली कॉलेज के एक लिपिक ने तबादला कराने के लिए प्राचार्य के नाम पर उनसे डेढ़ लाख रुपये और कॉलेज प्रबंध समिति के एक उच्च पदाधिकारी के लिए सोने की मूर्ति की मांग की। सोमपाल सिंह ने प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन से की लिखित शिकायत में कहा है कि उनके बेटे ने लिपिक को 1.30 लाख रुपये दे दिए, लेकिन फिर भी उसका तबादला नहीं हुआ। उन्होंने लिपिक से रुपये वापस मांगे तो उसने 90 हजार रुपये लौटा दिए। प्राचार्य ने बताया कि इस प्रकरण में लिपिक रामौतार का नाम सामने आया है। तीन सदस्यीय समिति इस मामले की जांच कर रही है। इसमें डॉ. रीना अग्रवाल, चीफ प्रॉक्टर डॉ. वंदना शर्मा और कार्यालय अधीक्षक पंकज अग्रवाल शामिल हैं। टीम एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी।
यह मामला बेहद गंभीर है। सच्चाई जानने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। इसके बाद ही कोई कार्रवाई संभव होगी। - डॉ. अनुराग मोहन, प्राचार्य, बरेली कॉलेज