एम्स दिल्ली के डॉक्टरों के इनकार से ब्लड कैंसर से जूझ रही समीरन की जिंदगी बचाने की आखिरी आस ही नहीं टूटी, मन भी टूट गया। रात भर जागने के साथ साढ़े पांच सौ किमी से ज्यादा लंबे सफर ने सभी के शरीर को भी तोड़ दिया था। हारे तन-मन लेकर लौट रहे लोगों में किसी को यह ख्याल नहीं आया कि एंबुलेंस ड्राइवर पर बुरी तरह हावी थकान उन सबकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है... और दुर्योग से हुआ भी यही।
लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर फतेहगंज पश्चिमी के शंखा पुल के पास मंगलवार सुबह सड़क हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों समेत सात लोगों की मौत के पीछे समीरन बेगम को बचाने की नाकाम जद्दोजहद सबसे बड़ी वजह साबित हुई। कई दिनों से ब्लड कैंसर पीड़ित समीरन को एम्स दिल्ली में भर्ती कराने की कोशिश की जा रही थी। एम्स से 31 मई की तारीख मिलने के बाद उनके पति खुर्शीद, बेटा आरिफ, ननद सगीर बानो, बहन नसरीन और भतीजा जफर 29 मई की रात को उन्हें एंबुलेंस से लेकर दिल्ली रवाना हुए थे। 30 मई की सुबह साढ़े 11 बजे वे लोग एम्स पहुंचे।
एम्स में डॉक्टरों ने समीरन की हालत देखने के बाद भर्ती करने से इनकार कर दिया। बताया जाता है कि समीरन के परिवार के लोग डॉक्टरों के आगे काफी गिड़गिड़ाए, शाम तक रुककर समीरन को भर्ती कराने की कोशिश करते रहे लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार मायूस होकर रात एक बजे घर बिलसंडा (पीलीभीत) लौटने के लिए रवाना हुए। एंबुलेंस ड्राइवर मेहंदी खां भी खुर्शीद के रिश्तेदार थे। रात भर जागने के कारण थके हुए थे। समीरन को भर्ती कराने के लिए खुर्शीद के साथ लगे रहने की वजह से दिन में भी नहीं सो पाए। इसके बावजूद रिश्तेदारी का मामला होने की वजह से ही एंबुलेंस लेकर पीलीभीत के लिए चल पड़े।
अनुमान लगाया जा रहा है कि एंबुलेंस में थके-मांदे लोग पहले से नींद के आगोश में रहे होंगे, फतेहगंज पश्चिमी के शंखा पुल के पास ड्राइवर मेहंदी को भी झपकी आ गई। इसी बीच एंबुलेंस डिवाइडर को पार करते हुए बरेली से रामपुर की ओर जा रहे मिनी ट्रक से आमने-सामने टकरा गई। इस हादसे ने पलक झपकते ही एंबुलेंस में मौजूद सातों लोगों को मौत की नींद सुला दिया।
जाम लगा तो हाईवे की एक ही लेन से निकाला दोनों तरफ का ट्रैफिक
भीषण हादसा होने के बाद दिल्ली हाईवे पर जाम लग गया। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को क्रेन के जरिए हटाने के कारण दिल्ली की ओर जाने वाली लेन ब्लॉक हो गई। इस कारण फतेहगंज पुलिस ने एक ही लेन से दोनों तरफ का ट्रैफिक निकालना शुरू कर दिया। हालांकि इसके बावजूद काफी देर तक वाहन यहां से रेंग-रेंगकर गुजरते रहे। दोनों वाहनों को क्रेन से उठाकर थाने पहुंचाने के बाद हाईवे पर यातायात सामान्य हुआ। इस हादसे में ट्रक ड्राइवर की कोई गलती नहीं थी लेकिन कई लोगों की मौत होने के बाद वह इतना घबरा गया कि अपना ट्रक मौके पर ही छोड़कर भाग निकला।
घटनास्थल पर पहुंचे डीएम और एसएसपी
दुर्घटना में सात लोगों की मौत होने की सूचना मिलने के बाद सुबह करीब आठ बजे डीएम शिवाकांत द्विवेदी और एसएसपी रोहित सिंह सजवाण घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों अफसरों ने फतेहगंज पुलिस से हादसे के बारे में जानकारी ली। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से भी बातचीत की। डीएम ने फतेहगंज पुलिस को जल्द से जल्द सभी शवों का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें परिवार के सुपुर्द करने के निर्देश दिए।
हादसे में एंबुलेंस में सवार सात लोगों की दुखद मौत हुई है। इनमें छह लोग एक ही परिवार के थे, एंबुलेंस ड्राइवर भी इसी परिवार का रिश्तेदार था।
- रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी