बरेली। बैंकों की देशव्यापी हड़ताल का असर शुक्रवार को कारोबारी गतिविधियां पर दिखा। पेट्रोल पंपों, गैस एजेंसियों, किराना कारोबारियों, मंडी के आढ़तियों, थोक व्यापारियों के पास दिनभर की बिक्री के बाद करोड़ों रुपये की नकदी इकट्ठा हो गई। रकम बैंक में जमा नहीं हो पाने से अब उनको इसकी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। अब शनिवार और रविवार बैंकों में अवकाश रहेगा। ऐसे में यह आंकड़ा और बढ़ेगा।
ऐसे सरकारी विभाग जहां कैश भी जमा होता है, वहां एकत्र रकम बैंक में जमा नहीं हुई। राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ निजी क्षेत्र के नैनीताल बैंक की शाखाओं के भी ताले नहीं खुले। हड़ताल की वजह से व्यापारियों के चेक क्लीयर नहीं हो सके। आरटीजीएस, एनईएफटी, नकदी प्रबंधन आदि कार्य प्रभावित रहे। दूसरी ओर, आईसीआईसीआई, एक्सिस, यस बैंक, एचडीएफसी, सिटी यूनियन बैंक आदि में जहां यूनियनें प्रभावी नहीं हैं, वहां कामकाज हुआ।
कारोबारियों को सता रही सुरक्षा की चिंता
पेट्रोल पंपों पर 40 फीसदी नकद भुगतान होता है। रविवार तक आने वाले कैश की सुरक्षा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। हाईवे पर संचालित पेट्रोल पंप ज्यादा संवेदनशील है। पुलिस को वहां गश्त बढ़ानी चाहिए। - मनोहर पटेल, पेट्रोल पंप संचालक
ग्राहक नकद और ऑनलाइन दोनों तरह से भुगतान करते हैं। बैंक बंद होने से कैश जमा नहीं हो सका, पर प्रतिष्ठान में लॉकर हैं और दो-दो गार्ड तैनात रहते हैं। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इससे निगरानी की जाएगी। - सुबोध अग्रवाल, राफा कारोबारी
शहर के बड़े प्रतिष्ठान सुरक्षित हैं, लेकिन आलमगिरीगंज, साहूकारा, बड़ा बाजार में पुलिस को गश्त बढ़ानी चाहिए। देहात और कस्बों की छोटी दुकानें सुरक्षा की दृष्टि से अधिक संवेदनशील हैं। - राजकुमार अग्रवाल, अध्यक्ष, बरेली सराफा एसोसिएशन
रोडवेज के अधिकारी ने एसएसपी से की सुरक्षा की मांग
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक मोहम्मद अजीम ने बताया कि रोडवेज पर रोजाना करीब एक करोड़ का कैश जमा होता है। उसे अगले दिन बैंक में जमा कराते हैं। बृहस्पतिवार को जमा एक करोड़ कैश समेत तीन दिन में करीब चार करोड़ रुपये नकदी जमा होगी। इसलिए एसएसपी को पत्र भेजकर सुरक्षा व्यवस्था के लिए कहा है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी ने बताया कि बृहस्पतिवार को पांच लाख कैश जमा हुआ। बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता ललित कुमार ने बताया कि बड़े बकायेदारों को सोमवार को बिल जमा करने के लिए कहा गया है।
तीन दिन नकदी अटकी तो कैश फ्लो पर दबाव
पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी : रोजाना की बिक्री का बड़ा हिस्सा नकदी में आने के कारण बैंक में जमा नहीं हो सका। तीन दिन तक कैश सुरक्षित रखना चुनौती है।
किराना और थोक बाजार : थोक खरीद के भुगतान, सप्लायरों को बैंकिंग के माध्यम से भुगतान और बड़े कैश डिपॉजिट प्रभावित हुए। छोटे डिजिटल भुगतान चलते रहे, लेकिन बड़े भुगतान में अड़चन आई।
मंडी और आढ़त कारोबार : किसानों और व्यापारियों के बीच भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई। एक-दूसरे के खातों में रकम ट्रांसफर और चेक क्लीयरेंस में देरी का असर आगे के कारोबार पर पड़ सकता है।
सराफा बाजार : सोना-चांदी के बड़े सौदों में बैंकिंग से भुगतान की जरूरत होती है। शाखाएं बंद रहने से भुगतान प्रभावित रहे। हालांकि छोटे लेन-देन डिजिटल माध्यमों से होते रहे।
औद्योगिक इकाइयां : कच्चे माल के भुगतान, सप्लायरों के बकाये और कर्मचारियों से जुड़े बैंकिंग कार्यों पर असर पड़ा। लगातार बंदी बढ़ने पर वर्किंग कैपिटल का चक्र प्रभावित होने की आशंका है।
सौ करोड़ से ज्यादा की नकदी अटकने का अनुमान
जिले की बैंक शाखाओं में रोज 350 करोड़ का लेन-देन होता है। तमाम डिजिटल माध्यमों के बावजूद तीन दिनों में सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी अटकने का अनुमान है। जिले में करीब दो सौ पेट्रोल पंप हैं। एक कारोबारी ने बताया कि अनुमानित रूप से प्रत्येक पेट्रोल पंप पर रोजाना औसतन 10 लाख रुपये की नकद बिक्री होती है। यानी रोज 20 करोड़ रुपये नकद आते हैं। इस लिहाज से पंपों पर तीन दिन में 60 करोड़ रुपये की नकदी एकत्र होगी। इसी तरह जिले की 90 गैस एजेंसियों पर रोजाना तीन-चार लाख रुपये की नकदी आती है। इस लिहाज से तीन दिनों में आठ से नौ करोड़ रुपये की नकदी जुट जाएगी। जिले में करीब 600 शराब की दुकानें हैं। यहां भी तीन दिन में करीब छह करोड़ रुपये की नकदी अटकने का अनुमान है। रोडवेज में रोजाना एक करोड़ रुपये नकदी जुटती है, जिसे अगले दिन बैंक में जमा किया जाता है। इस लिहाज से उनके पास बृहस्पतिवार का भी कैश मौजूद है। रविवार तक उनके पास करीब चार करोड़ रुपये की नकदी जुट जाएगी। सराफा कारोबारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन छोटे-मोटे गहने खरीदने वाले ग्राहक यहां भी नकदी में ही भुगतान करते हैं। यहां भी करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी एकत्र होने का अनुमान है। किराना बाजार, निर्माण सामग्री व अन्य मंडियों में भी तीन दिनों में करीब 20 करोड़ रुपये की नकदी जुटने का अनुमान है।
यूनाइटेड फोरम ने किया प्रदर्शन
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने सिविल लाइंस स्थित इंडियन बैंक के बाहर प्रदर्शन किया। नारेबाजी कर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। फोरम के जिला संयोजक नवींद्र कुमार ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने पर 28, 29, 30 सितंबर को हड़ताल, 26 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। मांगों में पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह, पीएलआई विसंगति दूर करने, द्विपक्षीय समझौते की भावना का सम्मान करने, पेंशन अपडेशन, पुरानी पेंशन बहाली, हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी कम करने, बेहतर ग्राहक सेवा के लिए बैंकों में पर्याप्त भर्ती की मांग की। फोरम के अध्यक्ष पीके माहेश्वरी ने कहा कि सरकार को हठधर्मिता छोड़कर समस्याओं का समाधान करना चाहिए। यहां ओपी बढ़ेरा, संतोष तिवारी, रश्मि शर्मा, इंडियन बैंक के अधिकारी संघ के नेता अश्विन आर्य, संजीव मेहरोत्रा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।