बरेली। केंद्र और प्रदेश सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तमाम योजनाएं संचालित कर रही हैं। इसके तहत उनको स्वरोजगार के लिए ऋण दिए जाने का प्रावधान है, पर बैंक इसमें रोड़ा अटका रहे हैं। जिले की कई बैंक शाखाओं में महिलाओं के आवेदन कारण बताए बिना ही निरस्त किए जा रहे हैं। बार-बार बैंकों का चक्कर काटने के बाद थक-हारकर ये महिलाएं घर बैठ जा रही हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में जिले के सरकारी व निजी बैंकों में 1,36,744 महिलाओं ने ऋण के लिए आवेदन किया था। इसमें से 60,347 महिलाओं को ऋण नहीं दिया गया। इनकी फाइल किसी न किसी कारण से लौटा दी गई। वित्त वर्ष 2024-25 में दिसंबर तक 1,36,283 महिलाओं ने आवेदन किया था। इसमें से 89,279 महिलाओं को ऋण नहीं मिल सका।
एलडीएम वीके अरोरा ने बताया कि कि फाइलों की जांच-परख के बाद ही किसी को ऋण दिया जाता है। अगर किसी की फाइल पास नहीं हो रही है तो उसके पीछे कोई वजह होगी। महिलाएं कमियों को दूर कर दोबारा आवेदन कर सकती हैं।
बैंकों के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं को ऋण देने के मामले में सरकारी बैंकों की अपेक्षा निजी बैंक ज्यादा सक्रिय है। वित्त वर्ष 2023-24 में निजी बैंकों ने 59562.01 लाख रुपये का लोन महिलाओं को दिया था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में दिसंबर तक 31585.86 लाख रुपये का लोन बांटा है। संवाद
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सिबिल स्कोर कम होने की वजह से रद्द कर दी फाइल
कर्मचारी नगर की रीना ने बताया कि उनका पति के साथ ज्वाॅइंट खाता था, लेकिन सिबिल स्कोर अच्छा नहीं था। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने स्वरोजगार के लिए एक निजी बैंक में आवेदन किया था। सिबिल स्कोर ठीक नहीं होने से उनकी फाइल रद्द कर दी गई। रीना का कहना है उन्होंने कभी लोन नहीं लिया तो उनका सिबिल स्कोर खराब कैसे हो सकता है?
कागजात पूरे होने के बावजूद नहीं मिल रहा लोन
सीबीगंज की रहने वाली निशा ने बताया कि ब्यूटी पार्लर खोलने के लिए उन्हें रुपयों की जरूरत थी। इंडियन बैंक में लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन उनकी फाइल पास नहीं हो रही है, जबकि उनके कागजात भी पूरे है। बार-बार फाइल अस्वीकृत कर दी जा रही है, पर इस संबंध में बैंक की ओर से कोई कारण नहीं बताया जा रहा है।