बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएएमएस (बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) अंतिम वर्ष के 50 विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है। बार-बार फेल होने की वजह से चार साल का कोर्स सात साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। छात्रों का आरोप है कि मनमाने ढंग से कॉपियां जांची जाती हैं। सही मूल्यांकन होता तो वह अब तक डॉक्टर बनकर अपना कार्य शुरू करते या फिर कहीं परास्नातक कर रहे होते। कॅरिअर को लेकर चिंतित विद्यार्थियों ने मंगलवार को परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में प्रार्थनापत्र दिया।
छात्रों का कहना है कि हर वर्ष एक बैच से सिर्फ पांच फीसदी विद्यार्थी पास होते हैं। बाकी को सप्लीमेंट्री भरनी पड़ती है। जब आरटीआई के तहत सप्लीमेंट्री की सूचना मांगी गई तो पता चला कि एक-एक प्रश्न में एक व दो अंक दिए गए हैं। प्रश्न के कुछ हिस्सों पर सही व कुछेक पर क्रॉस का चिह्न लगाया गया है। मनमाने ढंग से अंक दिए जा रहे हैं। इस वजह से हर बार वह छह माह पीछे हो जाते हैं। जब सप्लीमेंट्री में बैक आती है तो इसे चुनौती देने का प्रावधान भी खत्म कर दिया गया है। एक छात्र ने बताया कि वह तीन बार काय चिकित्सा की सप्लीमेंट्री परीक्षा दे चुका है। दो दिनों से बीएएमएस के विद्यार्थी मुरादाबाद से आकर विश्वविद्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। संवाद
सप्लीमेंट्री को चैलेंज करने का कोई प्रावधान नहीं है। जो छात्र असंतुष्ट हैं, वे आरटीआई से अपनी कॉपियां व प्रार्थनापत्र लेकर आएंगे तो उसे एक्सपर्ट से दिखवाया जाएगा। - संजीव सिंह, परीक्षा नियंत्रक, रुहेलखंड विश्वविद्यालय