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Bareilly News: बरेली सेंट्रल जेल आने से पहले बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को मिली जमानत

Sat, 27 Apr 2024 01:37 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

पूर्व सांसद धनंजय सिंह के बरेली सेंट्रल जेल रवाना होने की सूचना वरिष्ठ जेल अधीक्षक अविनाश गौतम को मिली तो उन्होंने यहां तैयारियां शुरू करा दी थीं। लेकिन यहां पहुंचने से पहले ही धनंजय सिंह को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। 
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जौनपुर जेल से बाहर निकलते पूर्व सांसद धनंजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जौनपुर के पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह को जौनपुर से बरेली सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने से पहले ही जमानत मिल गई। धनंजय को लेकर पुलिस बरेली रवाना हुई, इससे पहले शनिवार दोपहर हाईकोर्ट का फैसला आ गया। धनंजय की जमानत मंजूर कर ली गई लेकिन चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। हाईकोर्ट ने सजा पर रोक से इन्कार कर दिया है।

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बरेली सेंट्रल जेल में साफ कराई गई बैरक
धनंजय सिंह के बरेली सेंट्रल जेल रवाना होने की सूचना वरिष्ठ जेल अधीक्षक अविनाश गौतम को मिली तो उन्होंने यहां तैयारियां शुरू करा दी थीं। बैरक की साफ सफाई कराई गई। साथ ही जेल में सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए। सेंट्रल जेल में पहले से ही माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव और उसका साथी मंगे सरदार आदि बंद हैं। 

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पिछले दिनों यहां बंद कैदी आसिफ व समीर उर्फ राका ने जेल के अंदर के फोटो व वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी थी। इन मामलों में दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। जेल के कुछ कर्मचारियों को निलंबित तो डिप्टी जेलर को मुख्यालय अटैच किया गया था। दोपहर एक बजे तक धनंजय को बरेली सेंट्रल जेल नहीं लाया जा सका था। जेल अधीक्षक का कहना था कि यहां तैयारियां पूरी हैं। धनंजय सिंह को उनकी जेल में लाया गया तो अन्य बंदियों की तरह सभी नियम कायदे उस पर भी लागू होंगे।

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राज्य सरकार के वकीलों ने किया था जमानत का विरोध
पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने वकील का कहना था कि अपील निस्तारण तक सजा का आदेश स्थगित रखने के साथ ही उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। राज्य सरकार की तरफ से वकीलों ने धनंजय सिंह के आपराधिक इतिहास में नहीं जोड़े गए मुकदमों के साथ दिल्ली व लखनऊ के आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। 

कहा कि कई मामलों में ट्रायल चल रहा है, ऐसे में जमानत देना उचित नहीं होगा, जबकि धनंजय के वकील का कहना था कि उन्हें राजनीतिक दुर्भावना के तहत झूठा फंसाया गया है। जो तीन गवाह हैं, उनमें दो सरकारी कर्मचारी और एक प्रोजेक्ट का कर्मचारी है, उन पर दबाव बनाकर झूठी गवाही कराई गई। माना जा रहा है कि कोर्ट में अभियोजन पक्ष की दलील बेअसर रहीं।
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