बरेली। गलत संगत से दूरी बनाना कितना जरूरी है यह जिला अस्पताल की ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर की रिपोर्ट बयां कर रही है। यहां इलाज करा रहे मरीजों में से सात एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। काउंसिलिंग और जांच में सामने आया कि अधिकांश संक्रमित मरीज नशा करने के दौरान दोस्तों के साथ एक ही सिरिंज का उपयोग कई बार करते थे। इसी लापरवाही ने उन्हें एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी का शिकार बना दिया। हालांकि अब इनका इलाज आरंभ हो चुका है।
ओएसटी सेंटर में 95 नशा पीड़ित मरीज पंजीकृत हैं, जिन्हें नशे की आदत छुड़ाने के साथ नियमित काउंसिलिंग और दवा दी जा रही है। लेकिन इस वर्ष पंजीकृत हुए कुल 30 मरीजों में एचआईवी संक्रमण के लक्षण और जोखिम को देखते हुए विभिन्न जांच कराई गईं, जिनमें सात एचआईवी पॉजिटिव मिले। संक्रमित मरीजों को अब एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर से इलाज दिया जा रहा है। मरीजों ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि नशा करने के लिए दोस्तों के समूह में एक ही सिरिंज का कई लोग इस्तेमाल करते थे। यही संक्रमण फैलने की सबसे बड़ी वजह बनी। संवाद
वर्जन
इंजेक्शन के जरिए नशा करने वालों में एचआईवी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए एक बार उपयोग की गई सिरिंज का दोबारा कभी उपयोग न करें। सेंटर पर ऐसे कई युवा मरीज समूह में एक सिरिंज का उपयोग नशे के लिए करते थे। वे एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं। इन मरीजों का एआरटी सेंटर से इलाज कराया जा रहा है। नशे से मुक्ति के लिए ओएसटी सेंटर की मदद ली जा रही है।
- डॉ. आशीष, प्रभारी, ओएसटी सेंटर, जिला अस्पताल।