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शाम ढले जंक्शन और बस अड्डों पर बढ़ी भीड़

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बरेली। सुबह फैसला आने से पहले रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर सन्नाटा रहा। अवकाश की वजह से दैनिक यात्री नहीं थे तो बाकी ने अयोध्या फैसले की वजह से सफर का रिस्क नहीं लिया। फैसला आने के बाद दोपहर में भी ऐसे ही हालात थे। जंक्शन पर दोपहर तीन बजे तक सन्नाटा पसरा था। शाम होने के साथ ही भीड़ बढ़ गई। सात बजे श्रमजीवी एक्सप्रेस निकली तो मुसाफिरों की जबर्दस्त भीड़ थी। रात में जंक्शन से गुजरने वाली बाकी ट्रेनों का भी ऐसा ही हाल था। रात में सेटेलाइट बस अड्डे पर भी भीड़ बढ़ी। हालांकि पुराने बस अड्डे पर स्थिति सामान्य थी।
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पुलिसवालों ने मोबाइल से जाना फैसला
अयोध्या पर फैसले को लेकर उत्सुकता केवल जनता में ही नहीं थी, पुलिसकर्मियों में भी नजर आई। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी मोबाइल पर अयोध्या प्रकरण से जुड़े फैसले की जानकारी और अपडेट लेते रहे। कुतुबखाना चौराहे पर भी ऐसे पुलिसकर्मी मौजूद थे। अयूब खां और अन्य स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मी फैसले के बाद फुर्सत के क्षणों में इस पर चर्चा करते रहे।

पुलिस ने वाहनों से कराई मुनादी
कोतवाली और अन्य थानों की पुलिस ने अपने क्षेत्र में जीपों और बाइक से घूमकर मुनादी कराई। लोगों को समझाया गया कि किसी तरह की अफवाह फैलाने वाले या सौहार्द बिगाड़ने वालों की तत्काल सूचना दें। शांति बनाए रखें। किसी के धमकाने या किसी तरह के भय में न आएं। सब ठीक है। अगर कोई समस्या है तो पुलिस को तत्काल बताएं।
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बारावफात मेले में झूले पर की बच्चों ने मस्ती
फैसले के दौरान और बाद में शाहबाद, बानखाना आदि अल्पसंख्यक बहुल बस्तियों में आम दिनों के मुकाबले सन्नाटा था। वहीं, बच्चे पूरी मस्ती में थे। शाहबाद में लगे बारावफात के मेले में हर समुदाय के बच्चों ने मस्ती की। उन्होंने झूला झूला और चाट पकौड़ी का आनंद लिया।

परचून की दुकानों पर लगीं कतारें
फैसले से पहले सुबह सात बजे से ही परचून और दैनिक जरूरतों की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ थी। पुराना शहर की दुकानों पर तो ग्राहकों की कतारें लगी थीं। दुकानदारों ने भी सामान निकलवाने और बिल बनवाकर रुपये वसूलने के लिए कई लोग लगा रखे थे। दुकानदारों ने स्वीकार किया कि लोगों ने सुबह दस बजे तक आटा, नमक, दाल जैसी चीजों की ज्यादा खरीदारी की। इसके बाद बिक्री थम गई। ग्राहकों का भी कहना था कि पता नहीं कोई समस्या हो जाए तो क्या करेंगे।

दुकानें छोड़कर देखा लाइव
फैसले के वक्त मेन मार्केट के दुकानदारों ने अपनी दुकानें या तो पूरी तरह बंद कर दीं या आधा शटर डालकर पड़ोस की ऐसी दुकानों पर चले गए जहां टीवी/एलईडी लगी थी। उन्होंने वहीं साथ बैठकर फैसला सुना और अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। इनमें सभी वर्गों के व्यापारी थे, जो हमेशा की तरह एक साथ दिख रहे थे।

पूर्व मंत्री के आवास पर दीए जले, कालीबाड़ी में सड़क पर आतिशबाजी
तमाम रोक के बावजूद कालीबाड़ी इलाके में शनिवार शाम दिवाली जैसा माहौल था। यहां बच्चियों ने घर के बाहर और छतों पर दीए और मोमबत्तियां जलाईं। पूर्व मंत्री राजेश अग्रवाल के दरवाजे पर भी दीए जलाए गए। मोहल्ले के बच्चों ने सड़क पर आतिशबाजी की। शहर के अन्य स्थानों पर भी जोरदार आतिशबाजी की गई। हालांकि अफसरों ने आतिशबाजी को शादी-बरातों से जुड़ा बताया।
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