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जागा नगर निगमः रिहायशी इलाकों में दुकानें-शो रूम चलाने वालों से वसूला जाएगा टैक्स

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demo pic - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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आवास विकास राजेंद्रनगर, रामपुर बाग, सिविल लाइंस के बड़े आवासीय क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहीं व्यावसायिक गतिविधियां

बरेली। नगर निगम अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए सर्वे की तैयारी कर रहा है। यदि आपने अपने मकान में कुछ परिवर्तन कराया यानी और ज्यादा कमरे बनवा लिए हैैं या आवासीय भवन का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैैं तो आने वाले समय में आपसे अधिक कर वसूला जाएगा। नगर निगम अब शहरी सीमा में बने मकानों का नए सिरे से सर्वे कराने जा रहा है। सर्वे में यह देखा जाएगा कि मकान में जितने हिस्से का कर निर्धारण हुआ है, बाद में कहीं और निर्माण तो नहीं करा लिया गया और वह हिस्सा कर के दायरे में है या नहीं। सर्वे के बाद ऐसे सभी मकानों से बढ़ाकर टैक्स वसूला जाएगा। आवासीय भवनों का व्यावसायिक इस्तेमाल मिलने पर भी कर में वृद्धि की जाएगी।
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नगर निगम अब आवासीय परिसर में व्यवसायिक गतिविधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। जबकि बिजली विभाग पहले से ही घरों में कारोबार करने वालों से ज्यादा कीमत वसूल रहा है। इसी तर्ज पर अब नगर निगम ने भी गृह और जलकर आदि वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है। महानगर क्षेत्र में आधे से अधिक मकान परिसरों में दुकान, शोरूम और अन्य गतिविधियां संचालित हैं। आवास विकास परिषद द्वारा विकसित कालोनी राजेंद्रनगर, जानकीपुरम, इंदिरा नगर, बीडीए द्वारा निर्मित डीडी पुरम, टीबरीनाथ कालोनी आदि में बड़े प्रतिष्ठान हैं। राजेंद्रनगर में आवास विकास परिषद की मिलीभगत से आवास तोड़कर बड़े शोरूम तैयारी हो चुके हैं। जबकि इनका नगर निगम टैक्स अभिलेखों में अभी तक आवासीय है। नगर निगम राजस्व और निर्माण विभाग खुद ही लोगों को तरकीब बताकर टैक्स में हेराफेरी कर रहे हैं।

पॉश कालोनी में बड़े शोरूम और कारोबार

रामपुर बाग, सिविल लाइंस, पीलीभीत बाईपास, राजेंद्रनगर, आकाश पुरम, ग्रीन पार्क आदि पॉश कालोनियां भी अछूती नहीं हैं। कहीं पर मेडिकल स्टोर, नर्सिंग होम तो कहीं पर सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय आदि खुले हुए हैं। प्रेमनगर, बड़ा बाजार, किला, सुभाषनगर, सीबी गंज, श्याम गंज, कालीबाड़ी, स्टेडियम मार्ग, एकता नगर, इज्जतनगर, पुराना शहर समेत सभी क्षेत्रों में तमाम आवासीय परिसर में कारोबार हो रहा है।

तीन लाख से ज्यादा आवासीय परिसर में धड़ल्ले से कारोबार

एक सर्वे के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में तीन लाख से अधिक घरों में बड़ा-छोटा कारोबार, उद्योग-धंधा चल रहा है। 48 गांव शामिल होने से नगर निगम का विस्तार और ज्यादा हो गया है। निगम कार्य क्षेत्र स्थित आवासीय परिसर में छोटे उद्योग, चक्की, नमकीन, खानपान, अचार, डेयरी, जरी, ब्यूटी पार्लर, शिक्षण संस्थाएं आदि सैकड़ों तरीके के धंधे बड़ी तादात में चल रहे हैं।

नगर निगम के खाते में सिर्फ 20 हजार व्यावसायिक करदाता

अभिलेखों में दर्ज करीब डेढ़ लाख भवन स्वामियों से नगर निगम टैक्स वसूलता है, इनमें से बमुश्किल 20 हजार व्यावसायिक भवन मालिक करदाता हैं। जबकि अपर नगर आयुक्त कहना है कि यह पुराना रिकार्ड है। वर्तमान में ऐसे कई भवन है जो नगर निगम के कागजों में आवासीय भवन में दर्ज हैं मगर उसमें काफी लंबे समय से व्यवसायिक गतिविधि शुरू हो चुकी है। ऐसे में कर विभाग से दोबारा नए सिरे से सर्वे करने के लिए कहा गया है। जिससे, जो आवासीय भवन व्यवसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे हैं, उन्हें कर के दायरे में लाकर नगर निगम की आमदनी को बढ़ाया जा सके।

नीचे दुकान.. ऊपर मकान

ज्यादातर मुख्य मार्ग, कालोनी, मोहल्ला-गली में तमाम लोगों ने आवासीय परिसर में निर्माण संशोधन कर रिहायश ऊपर कर ली है। अधिकांश लोगाें ने दुकानें किराए पर दे रखी हैं। इससे मोटी आय हो रही है। जबकि कुछ लोगों ने खुद ही धंधा शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि लोगों ने किरायानामा ही रजिस्टर नहीं कराया है। इसलिए इसकी सही तादाद भी नहीं पता चल पाती है। नगर निगम कार्यालय के आसपास सौ से ज्यादा लोगों ने ऊपर मकान बनाकर नीचे दुकानें किराए पर उठा दी हैं।

‘लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रहीं हैं कि तमाम लोगों आवासीय परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां कर रहे हैं। इनकी तादाद बढ़ रही है। पॉश कालोनियाें कुछ ज्यादा बड़े कारोबार हो रहे हैं। इन परिसरों को व्यावसायिक दायरे में लाने के लिए सर्वे प्रस्तावित है। इसके तहत भवनों में चल रहे कारोबार की श्रेणी आदि ब्योरा संकलित होगा।’ - अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त

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