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Bareilly News: रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में तैयार हुई एवोकाडो की बगिया, कृषि नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

Thu, 07 May 2026 04:47 PM IST
Mukesh Kumar विराट कुलश्रेष्ठ, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में एवोकाडो की महक बिखरेगी। कुलपति आवास के पास एवोकाडो की बगिया विकसित की गई है। यह बगिया कृषि पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशाला का काम करेगी। 
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एवोकाडो के पौधे - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के परिसर में एवोकाडो बगिया विकसित की गई है। यह बगिया कृषि अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगी, साथ ही विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला का काम करेगी। इसमें बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे जल संरक्षण सुनिश्चित होगा।

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विश्वविद्यालय के कुलपति केपी सिंह के मार्गदर्शन में यह पहल साकार हुई है। कृषि एवं प्रौद्योगिकी संकाय के विद्यार्थियों ने इसे तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाई है। कुलपति का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च मूल्य वाली फसलों की आधुनिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।

विश्वविद्यालय ने इसी सत्र से बीएससी (ऑनर्स) कृषि और  एमएससी कृषि के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। एवोकाडो, जिसे दुनियाभर में बटर फ्रूट के नाम से जाना जाता है, अपनी उच्च पोषण क्षमता और स्वास्थ्य लाभों के कारण वैश्विक बाजार में बेहद मांग है।

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 500  रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है एवोकाडो की कीमत
एवोकाडो की खेती अब तक दक्षिण भारत तक सीमित थी, लेकिन यह प्रयोग उत्तर प्रदेश में भी इसकी संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। बाजार में विदेशी एवोकाडो की कीमतें 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती हैं। स्वदेशी उत्पादन से किसानों को प्रति एकड़ 10 लाख  रुपये तक का मुनाफा होने की उम्मीद है। वर्ष 2024 में इसके आयात में 114 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो बढ़ती खपत दर्शाती है।  
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किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र
विश्वविद्यालय का कृषि विभाग हास, फ्यूरटे और अर्को सुप्रीम जैसी उन्नत किस्मों पर शोध कर रहा है। इसका उद्देश्य बरेली, पीलीभीत, बदायूं और शाहजहांपुर के किसानों तक खेती की बारीकियां पहुंचाना है। कुलपति केपी सिंह ने कहा कि यह बगिया किसानों के लिए प्रशिक्षण का केंद्र बनेगी, जिससे वे उच्च लाभकारी फसलों की ओर रुख कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकेंगे। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को स्मार्ट कृषि और स्टार्टअप के लिए तैयार कर रहा है, जिसके लिए पॉलीहाउस और उन्नत प्रयोगशालाएं बनाई जा रही हैं।
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