बरेली। चीन के दो शहरों से शुरू हुआ कोरोना वायरस अब दुनिया भर में कहर बरपा रहा है लेकिन चीन ने उस पर अब काफी हद तक काबू पा लिया है। इसके बाद वहां यातायात व्यवस्था भी धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। चीन ने यह कमाल सोशल डिस्टेंसिंग यानी लोगों के बीच दूरी बनाकर ही किया। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक जब चीन में कोरोना संक्रमण चरम पर था, तब उसने अपने 1119 एक्सप्रेस वे बंद कर दिए थे जिन्हें अब खोला जा रहा है। हालांकि कई शहरों में अब भी लॉक डाउन की स्थिति बनी हुई है।
चीन ने कोरोना पर काबू पाने के लिए सबसे पहले लोगों के कहीं भी आने-जाने पर रोक लगा दी। लोगों को घरों में बंद कर दिया गया। वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया। जिम, स्टेडियम, सड़कों के किनारे और तमाम दूसरी जगहों पर अस्पताल बना दिए गए। मॉल्स, स्कूल और ऐसी ही अन्य सार्वजनिक जगहों पर लोगों के इकट्ठे होने पर सख्ती से रोक लगाई गई। सख्ती से लागू किए गए इन प्रयासों के बाद अब चीन में स्थिति यह है कि कोरोना के मरीजों की संख्या रिकार्ड स्तर तक घटी है। पहले जहां चीन में रोजाना 100 से ज्यादा कोरोना के केस मिल रहे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर औसतन 7.8 रोज के औसत पर पहुंच गई है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक 14 मार्च तक चीन में 3199 लोगों की मौत हो चुकी थी, इससे 80,844 लोग संक्रमण के शिकार हुए थे। 54 हजार 278 लोग ठीक होकर अपने घरों को भी चले गए।
चीन ने यह भी किया..
- प्रभावित क्षेत्रों के प्रशासन ने कोरोना वायरस को लेकर ऑनलाइन या ऑफलाइन चर्चा करने पर पाबंदी लगा दी। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ बेहद सख्ती से कार्रवाई की गई।
- कोरोना प्रभावित सभी इलाकों में हेल्थ कोड नाम की प्रणाली तैयार करके लागू की गई। लोगों को उनके ट्रैवलिंग यात्रा रिकॉर्ड के मुताबिक लाल, पीला या हरे रंग का कोड दिया गया। इन्हीं कोड के आधार पर उन्हें इलाज की सुविधाएं दी गईं।
-चीन की कई कंपनियों ने चेहरा पहचानने की प्रणाली शुरू कर दी। इस प्रणाली की मदद से सार्वजनिक स्थल पर मास्क न पहनने वालों की पहचान की गई और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
-संक्रमित और बचाव के तरीके न अपनाने वाले लोगों की पहचान के लिए सोशल मीडिया की मदद ली गई। ऐसे लोगों को सुरक्षात्मक उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कई शहरों में संक्रमितों की पहचान बताने वालों को इनाम भी दिया गया।
-प्रशासन ने हर खाली और अच्छे स्थान पर अस्थायी अस्पताल बनाने का काम शुरू किया और कुछ ही दिनों में अस्पतालों का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर दिया। जिम और स्टेडियम जैसी जगहों को अस्पतालों में तब्दील किया गया। स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया। मॉल्स, सिनेमा हॉल्स समेत सभी भीड़ वाली जगहों पर लोगों के जाने पर रोक लगा दी गई।
-कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राष्ट्रीय और राज्य मार्गों के साथ काउंटी और टाउनशिप सड़कों को भी पूरी तरह बंद कर दिया गया। देश के सभी हाईवे का वायरस प्रभावित इलाकों से कनेक्शन खत्म कर दिया गया।
-प्रभावित इलाकों में ज्यादा से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों पर वो लोग जांच करा सकते थे जिन्हें कोरोना वायरस के संक्रमण का संदेह था।
-प्रांतों ने अंतरप्रांतीय सड़क यात्री परिवहन बंद कर दिया। शहरों में सार्वजनिक परिवहन बंद कर दिया गया था। इसके अलावा रेल परिवहन पर भी पाबंदियां लगा दी गई थीं।
-किसी भी तरह का कच्चा माल प्रभावित क्षेत्रों में भेजने और वहां से उत्पाद बाहर लाने पर रोक लगा दी गई थी। महामारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए टोल सड़कों से गुजरने वाले सभी वाहनों को टोल टैक्स से छूट दी गई थी।
-ऑनलाइन क्लासेस चलाई गईं। घरों में भोजन और अस्पतालों में दवाई पहुंचाने के लिए केंद्रीकृत सुविधाएं शुरू की गईं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुझाए हैं ये उपाय
-अल्कोहल आधारित साबुन और पानी का उपयोग करके बार-बार हाथ साफ करना।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकना।
-बुखार और खांसी से प्रभावित किसी भी व्यक्ति के निकट संपर्क से बचना।
- यदि बुखार, खांसी के साथ सांस लेने में कठिनाई हो रही हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाना।
- डॉक्टर को अपनी यात्रा के बारे में जानकारी देना।