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कोरोना तो पुराना है मगर इसका नया रूप जानलेवा

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सालों से स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है कोरोना के बारे में। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में 2001 में शामिल चैप्टर में कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

बरेली। जिस कोरोना वायरस की दहशत पूरी दुनिया दहली हुई है, उसके बारे में एक चैप्टर यूपी बोर्ड के 12वीं के पाठ्यक्रम में 2001 में शामिल कर दिया गया था। रमेश गुप्ता की लिखित पुस्तक ‘आधुनिक जंतु विज्ञान’ में इस वायरस का जिक्र है। किताब में इस वायरस के इलाज के संबंध में भी जानकारी दी गई है, हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि कोरोना के खतरनाक रूप कोविड- 19 से निपटने के लिए यह इलाज कारगर है या नहीं।
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इस किताब के मुताबिक कोरोना वायरस असल में उस रहीनो वायरस की ही एक प्रजाति है जो मौसम में बदलाव के दौर में खासकर सर्दियों में फैलता है। नासाकोश में कड़ापन, नाक बहना, छींकना, गले में खराश आदि इन दोनों वायरस से पीड़ित होने के समान लक्षण हैं। इन दोनों वायरस के संक्रमण का असर फेफड़ों पर होता है। कोविड- 19 जो पूरी दुनिया में हजारों लोगों की जान ले चुका है, वह भी इसी परिवार का वायरस लेकिन इन दोनों वायरस से बहुत ज्यादा खतरनाक है और दस गुना ज्यादा तेजी से फैलता है। आपस में दूरी बनाना ही इस वायरस से बचाव का सबसे बेहतर उपाय है।
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