मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने की सीमा 15 जून रखी थी जो करीब है। पर इलाकों की दशकों से बदहाल पड़ी ज्यादातर प्रमुख सड़कों के जीर्णोद्धार की सुगबुगाहट तक शुरू नहीं हुई है। लोगों का अब भी यही सवाल है कि मीरगंज इलाके की खस्ताहाल सड़के इस बरसात में भी सुधर पाएंगी या नहीं?
दस किमी लंबे शाही-भिटौरा रोड को लालकुंआ तक निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी ने उखाड़ दिया था। पर सड़क निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है। 15 किमी के शाही-धौंराटांडा रोड पर शाही से नारा फरीदापुर तक पैच वर्क हुआ है, पर आगे की सड़क का हाल ऐसा है कि गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ती है। मिर्जापुर चौराहे से शाही में जूनियर हाईस्कूल तक पैच वर्क हुआ है। पर नगर पंचायत दफ्तर के सामने पीडब्ल्यूडी रोड के गड्ढों में कीचड़, जलभराव से आवाजाही बाधित है। शाही से नारा फरीदापुर-अमौर-भोजीपुरा तक 18 किमी लंबा रोड में गड्ढे ही गड्ढे हैं।
छह साल पहले बना सात किमी लंबा सेवा ज्वालापुर-बिहारीपुर-दुनका रोड तो पूरी तरह उधड़ चुका है। मिर्जापुर चौराहे से नरखेड़ा-सुकली-बलेही पहाड़पुर तक के दस किमी लंबे रोड भी खस्ता हाल है। नारा फरीदापुर से केरा-धौंर सतुइया-अगरास तक के चार किमी लंबे रोड पर ढाई साल पहले पड़े पत्थर भी अब उखड़कर गायब हो चुके हैं। हालात यह हैं कि बाइक से जाने वाले लोग रोड पर उड़ती धूल मिट्टी से परेशान हो जाते हैं, दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। कुल्छा-लालकुआं दो किमी लंबा रोड भी पूरा उधड़ चुका है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने पिछले वर्ष खिरका-भिटौरा रोड के कुछ हिस्से पर सांसद निधि से खड़ंजा बिछवाया था लेकिन बाकी पूरा रास्ता कच्चा है। हाईवे पर दीपक के भट्ठे से खिरका सीएचसी तक का कच्चा रास्ता भी मरीजों, तीमारदारों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
मैंने एई कुमार शैलेश से फोन पर बात की है, उन्होंने आश्वासन दिया है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के हिसाब से 15 जून तक मीरगंज की सभी सड़कें गड्ढा मुक्त कर देंगे। - राजेश कुमार, एसडीएम
सीमा विवाद ने सड़कों उजाड़ दीं, बाजार वीरान कर दिए
आंवला। दो जिलों की सीमाओं के विवाद में 15 सालों उलझी सड़क गड्ढों में बदल चुकी है। इसका असर सीमा के पास के गांवों में लगने वाली साप्ताहिक बाजारों पर भी पड़ा है। महमूदपुर से बदायूं जिले के बार्डर के गांव और करेगी रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली एक किलोमीटर लंबी सड़क 15 साल पहले बनाई गई थी। बाद में सीमा विवाद के कारण इसका निर्माण किसी भी योजना के अंतर्गत नहंी कराया गया। शिवेंद्र बताते है कि पहले पड़ोस के गांव पेपल, मुड़िया आदि के ग्रामीण महमूदपुर में दैनिक सामान लेने आते थे। गांवों वालों ने रोड ठीक कराने के लिए तमाम जनप्रतिनिधियों को कई बार प्रार्थनापत्र दिए पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
बरसों बाद बदल रही है सड़क की किस्मत
क्योलड़िया। क्योलड़िया से सीधे पीलीभीत के बीसलपुर को जोड़ने वाला रोड वर्षों से उखड़ा पड़ा था। वर्ष 1996 में तत्कालीन विधायक की ओर से बनवाया गया क्योलड़िया -रुकुमपुर तक आठ किमी का ये टुकड़ा एक अरसे से उखड़ा पड़ा हुआ है। जगह-जगह पर यह रोड नहर के कारण भी कट चुका है। अब रोड को गड्ढ़ा मुक्त किए जाने के लिए काम शुरू किया गया है। शुक्रवार को मंडी समिति की ओर से भेजी गई जेसीबी मशीनों से रोड निर्माण का काम शुरू हो गया। इस रोड का निर्माण होने पर क्षेत्र के ग्रामों वैवाही, विजासिन, रुकुमपुर, प्रहलादपुर, जगतपुर, गुलड़िया और चंदपुर के साथ ही पीलीभीत के ढल्लिया व लालौर गुदरानपुर आदि के ग्रामीणों को फायदा होगा।