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गम और गुस्से में डूबी आधी आबादी ने दरिंदों के लिए मांगी सार्वजनिक फांसी

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गम और गुस्से में डूबी आधी आबादी ने दरिंदों के लिए मांगी सार्वजनिक फांसी - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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डॉक्टर बिटिया दुष्कर्म-हत्याकांड

ऐसी सजा मिले जो देश भर में दरिंदों को दहला दे

अपराजिता संवाद में जुटीं महिलाएं और बेटियां बोलीं- दरिंदगी करने वालों के मानवाधिकारों की बात करना अब बेमानी

बरेली। हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया की दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाकर हत्या से हर ओर उबाल है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन और श्रद्धांजलि सभाएं हो रहीं हैं। इनमें दरिंदों को फांसी देने की मांग हो रही है, ताकि ऐसी गंदी सोच रखने वालों के लिए यह सजा नजीर बन जाए। अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के बैनर तले जुटीं महिलाओं ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा, वे कब तक जुर्म सहेंगी। समाज को अब इस पर कड़े निर्णय लेने की जरूरत है। सरकार ऐसे मामलों को लेकर कड़ी सजा का प्रावधान करे, कोर्ट तेजी से सुनवाई करे और कड़े फैसले सुनाए। आरोपियों के चेहरे छिपाकर नहीं उन्हें सार्वजनिक रूप से खुलेआम सजा दी जाए।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बैनर तले मैत्रेयी गर्ल्स हॉस्टल में एकत्र हुईं छात्राओं ने कहा कि डॉक्टर बिटिया के साथ हुई ज्यादती के कसूरवार सिर्फ आरोपी ही नहीं, यह सिस्टम और समाज भी है। एक ओर बेटियों को आगे बढ़ाने और उनके सपने पूरे करने की बात की जा रही है और दूसरी ओर जब वे अपने सपने पूरे करने के लिए निकलती हैं तो कुछ हैवान मदद के बहाने दुष्कर्म कर उन्हें जिंदा जला देते हैं। ऐसे हैवानों को सबक सिखाने के लिए पूरे सिस्टम को ही बदलने की जरूरत है। सजा भी ऐसाी हो, जो दूसरों को सबक सिखाने वाली हो। अपराजिता के ही बैनर तले प्रभातनगर पार्क में एकत्र हुईं महिलाओं और बेटियों ने भी डॉक्टर बिटिया को न्याय दिलाने की मांग की। कहा, यह पहली घटना नहीं है। पहले भी इस तरह की वीभत्स घटनाएं हुई हैं लेकिन कुछ दिन विरोध प्रदर्शन, कैंडल मार्च और श्रद्धांजलि के बाद आक्रोश कम हो जाएगा। घटना के साथ ही आरोपियों को भी भुला दिया जाएगा। इसलिए ऐसे मामलों में ऐसी कार्रवाई की जरूरत है, जो दरिंदगी करने वालों के लिए नजीर बन जाए।
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बातचीत

दुष्कर्म के आरोपियों के लिए मानवाधिकार की बात बेमानी है। इनके लिए सात साल नहीं, आजीवन कारावास या फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए।
- जोजिफा शमशाद, एलएलएम छात्रा

इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई के लिए सख्ती की जरूरत है। सभी आरोपियों को फांसी की सजा ही पीड़िता के साथ न्याय होगा।
- शिवांगी, बीटेक छात्रा

घटना के चारों आरोपियों को फांसी होनी चाहिए। उन्हें इस तरह सजा मिले ताकि पता चले कि ऐसे लोगों की समाज में कोई जगह नहीं है।
- मकसूदा, एमबीए छात्रा

ऐसी घटना के आरोपियों को सार्वजनिक रूप से फांसी दे देनी चाहिए। टीवी पर उसका लाइव प्रसारण कर सख्ती का संदेश देना चाहिए।
- मानसी गौड़, बीएड छात्रा

ईरान और यूएई की तरह ही भारत में भी कड़े कानून की जरूरत है। ऐसे आरोपियों को फांसी के अलावा कोई और सजा कम ही कही जाएगी।
- सृष्टि, बीएड छात्रा

ऐसे आरोपियों के चेहरे छिपाकर नहीं, उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाए। ताकि उन्हें दी गई सजा अन्य दरिंदों की हिम्मत तोड़ सके।
- हिरा फातिमा, बीटेक छात्रा

डॉक्टर बिटिया के दोषियों को सरकार ऐसी सजा दे कि वे जिंदा भी रहें और जिंदगी भर उसका दंश भी झेलें। सरकार भी कानून में बदलाव करे।
- निरुपमा अग्रवाल, गृहणी

दुष्कर्म पीड़िता के आरोपियों को हाथ-पैर काटकर छोड़ देना चाहिए। ताकि इस घटना से सबक लेकर समाज में अन्य दरिंदे न पैदा हो सकें।
- तूलिका, गृहणी

ऐसे गंभीर मामलों में कोर्ट में तीन महीने में सुनवाई पूरी करके सजा दी जानी चाहिए। ऐसे दरिंदों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
- प्रीति अग्रवाल, गृहणी

सरकार इन दरिंदों के लिए ऐसी सजा जो उन्हें जिंदगी भर पीड़ा दे। साथ ही समाज के लिए यह सजा नजीर बने और ऐसी घटनाएं रुक सकें।
- शिल्पी मेहरोत्रा, गृहणी
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