दिहाड़ी पर कमाई करने वालों को भी नहीं छोड़ा
सूर्यकांत और शशिकांत अमर ज्योति लिमिटेड, अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड, अमर ज्योति हायर परचेज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड नाम की कंपनियों में एजेंटों और अपने सहयोगियों से लोगों से निवेश कराते थे। दोनों भाइयों ने दिहाड़ी पर कमाई कर गुजारा कर रहे ठेला-खोमचा वालों को भी नहीं छोड़ा और इनसे भी ठगी कर ली।
इनके अलावा, व्यापारियों और सरकारी कर्मचारियों को भी अपना शिकार बनाया। नगर निगम की कर्मचारी विनीता से 1.50 लाख रुपये निवेश कराए थे। कटरा चांद खां के ही सब्जी विक्रेता भगवानदास का कहना है कि उन्होंने बेटी की शादी के लिए दो लाख रुपये की एफडी कराई थी। कई और ठेला-खोमचा वालों ने भी अपने पसीने की कमाई निवेश की है।
सफेदपोशों के संरक्षण से शुरूआत में पुलिस ने भी नहीं डाला हाथ
कंपनी निदेशक सूर्यकांत भाजपा का महानगर अध्यक्ष था। तीन माह पहले जब उसके खिलाफ बदायूं में मामला दर्ज हुआ तो भाजपा से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने हाथ नहीं डाला। इस दौरान दोनों भाई खुद को बचाने के लिए सफेदपोशों के संरक्षण में पहुंच गए। बाद में जब भाजपा ने सूर्यकांत को पद से हटाते हुए उससे किनारा किया तो एसएसपी बदायूं ने जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी। तब तक दोनों भाई राजनीतिक संरक्षण में भूमिगत हो चुके थे। इसके बाद एसएसपी बदायूं ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये इनाम घोषित किया। बाद में डीआईजी ने इनाम की रकम को बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दिया।
तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत पर हैं आरोपी
करोड़ों की ठगी के आरोपी सूर्यकांत और शशिकांत की गिरफ्तारी में पुलिस की लापरवाही ने दोनों को हाईकोर्ट तक पहुंचने का मौका दे दिया। दोनों भाइयों ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने और अंतरित जमानत की मांग की। तर्क दिया कि तमाम दस्तावेज कंपनी के कार्यालय में रखे हैं। वह गिरफ्तारी के डर से कार्यालय नहीं जा पा रहे। जुलाई के दूसरे सप्ताह में हाईकोर्ट ने दोनों को तीन सप्ताह की अंतरित जमानत दे दी, लेकिन इसके बाद भी दोनों ने किसी निवेशक को रुपये वापस नहीं किए। इधर, एसआईटी जांच भी धीमी हो गई है।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि अमर ज्योति के निदेशक और एजेंट के खिलाफ बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। इससे पहले भी धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज किया जा चुका है। दोनों मामलों में जांच की जा रही है।