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अनिल शास्त्री ने कहा, शास्त्री जी की मौत की जांच होनी चाहिए

Wed, 02 Dec 2015 01:13 AM IST
बरेली
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बरेली। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत नेचुरल नहीं थी। ताशकंद में वह जहां रुके थे, वहां पर कमरे में घंटी तक नहीं थी। मेडिकल सुविधा नहीं थी यहां तक कि टेलीफोन तक कमरे में नहीं था। ठहरने की व्यवस्था भी बहुत दूर थी...यह हालात बताते हैं कि कि कुछ तो गड़बड़ था। दूसरे उनकी मौत के बाद पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री की मौत से जुड़े कुछ पहलुओं को बताया और उससे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने और जांच कराने की मांग की। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। अभी उसका कोई जवाब नहीं आया है।
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उन्हें किस पर शक है, इसका जवाब देते हुए लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के चेयरमैन ने कहा कि शिपिंग कंपनियों के मालिक धर्म तेजा का स्कैम का मामला भी हो सकता है, क्योंकि यह स्कैम शास्त्री जी की जानकारी में आ गया था और संभवत: उन्हें ताशकंद से लौटकर इस मामले में कोई कार्रवाई करनी हो, जिसकी वजह से कुछ ऐसा किया गया हो। क्या कोई राजनीतिक पार्टी या सियासी व्यक्ति की भी संलिप्तता हो सकती है, इस पर अनिल शास्त्री बोले, मुझे ऐसा नहीं लगता, किसी राजनीतिक व्यक्ति के इसमें शामिल होने का कोई कारण समझ में नहीं आता। किसी दूसरे देश का हाथ होने की बात भी उन्होंने सिरे से नकार दी। बोले, इसमें न तो ताशकंद, न पाकिस्तान या न रूस का कोई हाथ है। इसमें हमारे भारत के लोग ही शामिल हैं। इसकी वास्तविकता तो जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि शास्त्री जी की मौत के बाद मां ने कई बार जांच के लिए कहा था। उन्हें भी शक था, लेकिन जांच नहीं हो पाई। इसके बाद उनकी मौत से संबंधित किसी मामले में 2012 में एक आरटीआई डाली गई थी। इसमें सरकार ने जवाब दिया था कि हम सार्वजनिक नहीं कर सकते, क्योंकि सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं होगा। दूसरे हमारे वैश्विक संबंधों पर भी इसका खराब असर पड़ेगा।

प्रधानमंत्री मौन रहेंगे तो असहिष्णुता तो बढ़ेगी ही
भारत में असहिष्णुता पर उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नहीं बोलेंगे और उनके मंत्री ऐसी बयानबाजी करेंगे, आरएसएस बोलेगा तो फिर असहिष्णुता तो बढ़ेगी ही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया की बात करते हैं। उन्हें समझना होगा कि कोई भी कंपनी यहां पर इनवेस्ट तभी करेगी, जब बिजली, सड़क, पानी आदि का इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। वह स्वच्छता की बात तो करते हैं, लेकिन उस पर अमल कैसे किया जाए, यह बात नहीं उठती है। कूड़ा डस्टबिन में तो डालें, लेकिन सार्वजनिक जगह पर डस्टबिन हैं कहां? स्वच्छता के लिए कुछ इंतजाम भी करने पड़ते हैं। उन्हें यह भी समझना होगा कि वह भारत के प्रधानमंत्री हैं, न कि गुजरात के मुख्यमंत्री। उनकी भाषा में गंभीरता और गरिमा होनी चाहिए।
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