सिरौली/गुलड़िया। सिरौली स्थित साईं हेल्थ केयर अस्पताल में शुक्रवार को परिजन की सहमति के बगैर गर्भवती का ऑपरेशन करने और उसमें लापरवाही बरतने का आरोप है। नवजात बेटे की हालत बिगड़ने पर उसको शाहबाद रेफर किया गया। वहां शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद परिजन ने ग्रामीणों के साथ अस्पताल पर हंगामा किया। इसको देखकर चिकित्सक और अस्पताल का पूरा स्टाफ मौके से भाग गया। नायब तहसीलदार ने जांच कर रिपोर्ट सीएमओ को भेजी है।
गांव पलथा के लोकेश यादव ने बताया कि वह गर्भवती पत्नी छाया को 14 अगस्त की शाम को सिरौली पीएचसी लेकर आए थे। आरोप है कि वहां किसी ने नहीं देखा और बाहर ले जाने की सलाह दी गई। इस दौरान साईं हेल्थ केयर का कंपाउंडर देशपाल उनको झांसा देकर वहां ले गया। वहां बिना किसी चिकित्सकीय या रुपये के खर्च की सहमति के छाया का ऑपरेशन कर दिया गया। स्थिति बिगड़ने पर नवजात शिशु को शाहबाद रेफर किया गया, जहां शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। छाया को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज चल रहा है। विरोध करने पर अस्पताल प्रबंधन ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस को मामले की तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।
अस्पताल पर हंगामे की सूचना पर नायब तहसीलदार दीपक कुमार पुलिस के साथ वहां गए और जांच की। नायब तहसीलदार ने बताया कि टीम पहुंचने से पहले अस्पताल स्टाफ वहां से भाग चुका था। टीम ने पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज किए। जांच में अस्पताल में अनियमितताएं मिलीं। मामले की रिपोर्ट को मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को भेजी गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, साईं हेल्थ केयर के संचालक राजकुमार चौधरी ने पहले चंदौसी के आसफपुर में एक महिला का इलाज किया। इससे महिला की मौत हो गई। इसके बाद उसने सिरौली में अस्पताल संचालित करना शुरू कर दिया।
सफेद हाथी बना पीएचसी, 50 हजार की आबादी झोलाछापों के भरोसे
मामले में झोलाछाप की लापरवाही के अलावा स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी उभरी है। रामपुर सीमा पर स्थित सिरौली की 50,000 की आबादी के लिए बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्टाफ के अभाव में सफेद हाथी साबित हो रहा है। पीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि अस्पताल में महिला डॉक्टर न होने से प्रसूताओं को हायर सेंटर भेजा जाता है। अस्पताल एक डॉक्टर और दो संविदा कर्मी के भरोसे चल रहा है, जिससे अत्यधिक कार्यभार रहता है।
वर्जन
ऑपरेशन में लापरवाही के आरोप पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचने की जानकारी है। उनसे संपर्क कर नोडल अधिकारी को जांच समेत कार्रवाई की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। पीएचसी में स्टाफ तैनाती प्रक्रियाधीन है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
घटनास्थल पर एमओआईसी और नायब तहसीलदार को भेजा गया था। सभी पहलुओं पर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - सुशील कुमार मिश्रा, एसडीएम आंवला
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बिना डॉक्टर के संचालित एनआईसीयू में नवजात की मौत, लापरवाही का आरोप
शाहबाद (रामपुर)। बिना डॉक्टर के संचालित किए जा रहे निजी एनआईसीयू में भर्ती नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने एनआईसीयू संचालक पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने बरेली जिले के सिरौली थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
सिरौली थाना क्षेत्र के पलथा गांव निवासी लोकेश ने बताया कि 14 अगस्त को उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद वह पत्नी को सिरौली स्थित पीएचसी लेकर पहुंचे। आरोप है कि वहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण वह पत्नी को सिरौली के ही एक निजी अस्पताल में ले गए। निजी अस्पताल में प्रसव कराया गया, जहां उनकी पत्नी ने बेटे को जन्म दिया।
परिजन के मुताबिक, नवजात का जन्म समय से पहले होने के कारण उसकी हालत गंभीर थी। इसके बाद निजी अस्पताल के डॉक्टर ने नवजात को बेहतर उपचार के लिए शाहबाद के आंवला रोड स्थित एक निजी एनआईसीयू में भेज दिया।आरोप है कि एनआईसीयू में नवजात को भर्ती करने के कुछ घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने उपचार और मौत का कारण जानने का प्रयास किया। अस्पताल संचालक की ओर से उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई और वहां से भगा दिया गया। एनआईसीयू में डॉक्टर की नियमित मौजूदगी के बिना नवजात का उपचार किया जा रहा था। मामले में नवजात के परिजनों ने सिरौली थाने में तहरीर देकर सिरौली और शाहबाद के संबंधित निजी अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस प्रकरण में पुलिस मामले की जांच कर रही है।
- नवजात बच्चे की मौत का मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। अगर एनआईसीयू में ऐसा कुछ हुआ है तो जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे।-दीपा सिंह, सीएमओ रामपुर