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Bareilly News: रमजान के दूसरे अशरे में अल्लाह अता करता है मगफिरत

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बरेली। हुजुर अकरम का पाक इरशाद है कि रमजानुल मुबारक का दूसरा यानी दरमियानी अशरा मगफिरत का है। अल्लाह रब्बुल इज्जत इस अशरे में बहुत से लोगों की मगफिरत और दानशीलता फरमाता है। लिहाजा हम लोगों को खुसूसन इस अशरे में अल्लाह से मगफिरत की दुआ करनी चाहिए और फिजूल और बेवजह की बातों से परहेज़ करना चाहिए। रोजे की हालत में झूठ बोलने, चुगली करने, किसी को भला-बुरा कहने और गीबत करने से बचना चाहिए। रोजे की हालत में ऐसा करने से रोजा मकरू हो जाता है।
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सहरी व इफ्तार की फजीलत : सहरी की हदीसे पाक में बहुत फजीलतें आई हैं और सहरी को अम्बिया की सुन्नत फरमाया गया है। हुजूर-ए- अकरम का कहना है कि सहरी खाया करो, इसमें बहुत बरकत है, यह जरूरी नहीं कि पेट भर कर ही खाया-पिया जाए, बल्कि एक लुकमा या दो लुकमें, एक घूंट या दो घंट पानी पी लेने से भी सुन्नत अदा हो जाती है। इफ्तार खजूर या पानी से अफजल है, अगर न हो तो किसी चीज़ से भी इफ्तार किया जा सकता है। हदीसे पाक में फरमाया गया है कि रोजा इफ्तार के वक्त दुआएं कुबूल होती हैं। इसलिए इफ्तार से पहले दुआओं का एहतमाम किया जाए और इफ्तार के वक्त तक दुआ में मशगूल रहा जाए, अपनी मगफिरत, मां-बाप की मगफिरत, रिश्तेदारों की मगफिरत और उम्मत के लिए कसरत से दुआ-ए-मगफिरत की जाए। - मुफ्ती मोहम्मद मियां कासमी, मोहतमिम, मदरसा अरबिया काशीफुल उलूम
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