उन्होंने कहा कि सिर्फ सर्टिफिकेट दे देने से गैर शरई काम शरई नहीं हो सकता है। जो संस्थाएं इस तरह का खेल कर रही हैं तो वो मज़हब की आड़ में मुसलमानों को धोखा दे रही हैं। ये ऐसा कारोबार है जो अल्लाह का नाम लेकर ही शुरू होता है और दुनिया में कोई दूसरा कारोबार ऐसा नहीं है जो अल्लाह का नाम लेकर शुरू होता हो।
सिर्फ मीट उत्पाद पर लग सकता है टैग
मौलाना ने कहा कि हलाल टैग सिर्फ मीट पर ही लगाया जा सकता है, अगर अन्य किसी दूसरे उत्पाद पर इसे लगाया जा रहा है तो ये एक अच्छे शब्द का दुरुपयोग है। इस्लामी शरीयत में हलाल शब्द सिर्फ जानवरों के मांस के संबंध में इस्तेमाल हुआ है। इसके अलावा अन्य चीजों का इस्तेमाल जायज या नाजायज हो सकता है, लेकिन उन पर हलाल का टैग नहीं लगाया जाना चाहिए।
मौलाना ने आगे कहा कि कुछ संस्थाओं ने हलाल टैग की मार्केटिंग करना शुरू कर दिया था। हर चीज पर हलाल टैग लगाने के लिए हलाल सर्टिफिकेट इशू करके कमाई का एक माध्यम बना रखा था। हद यहां तक हो गई कि सब्जियों ,फलों , बिस्किट आदि खाने-पीने की चीजों पर भी हलाल टैग लगाया जाने लगा। मुस्लिम संस्थाओं को इस तरह की भ्रमित और गुमराह करने वाली चीजों से बचना चाहिए।
मौलाना ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि मीट की दुकानों के लाइसेंस पहले से ही प्रशासन ने जारी किए हैं, इसलिए जांच टीमें उनको परेशान न करें। मौलाना ने सरकार से मांग की है इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक हलाल बोर्ड का गठन करे, जिसमें ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जाए, जो शरई तौर पर काम करने में सक्षम हो।