बरेली। हवाई अड्डे के लिए दी गई जमीन के बदले एयरपोर्ट अथॉरिटी में नौकरी पाने का किसानों का सपना आखिरकार टूट गया। नौकरी पाने की आस में इन किसानों ने चार साल बाद भी अपनी जमीन का सरकार के पक्ष में बैनामा नहीं किया। अब अथॉरिटी के अधिकारियों की ओर से किसानों की मांग के संबंध में भेजी गई चिट्ठी के जवाब में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी यानी एसएलएओ ने साफ किया है कि भूमि अधिग्रहण के बदले नौकरी देने का कोई प्रावधान नहीं है। लिहाजा किसानों की यह मांग पूरी नहीं की जा सकती।
तत्कालीन डीएम गौरव दयाल की देखरेख में 2015 में हवाई अड्डे के लिए पीलीभीत रोड पर मुड़िया अहमदनगर में जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इस प्रक्रिया के दौरान काश्तकारों को सर्किल रेट से दोगुनी कीमत पर भुगतान किया गया था। इस बीच गाटा नंबर 491 की जमीन का अधिग्रहण करने में पेच फंस गया। 1.1150 हेक्टेयर क्षेत्रफल की यह जमीन तीन खाताधारक बुद्घसेन, मुन्नीदेवी और ऊषा देवी के नाम दर्ज थी। प्रशासन ने पहले चरण में 1.030 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया, दूसरे चरण में बाकी 0.0850 हेक्टेयर जमीन ली गई। इसमें नत्थूलाल और उनके भाई वीरपाल ने यह आपत्ति लगा दी कि वह अपनी 450 वर्गमीटर जमीन इस शर्त पर ही देंगे कि उन्हें एयरपोर्ट अथॉरिटी इसके बदले नौकरी दे। प्रशासन की ओर से कोई जवाब न दिए जाने पर इन किसानों ने सरकार के पक्ष में बैनामा भी नहीं किया। इस बीच उनकी जमीन अथॉरिटी हवाई अड्डे का निर्माण करा चुकी है। किसानों की ओर से इंडियन एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुख्यालय को पत्र लिखे गए थे, जिस पर अथॉरिटी के अफसरों ने जिला प्रशासन को लिखा था। अब एसएलएओ मदन कुमार ने अपने जवाब में साफ कर दिया है कि जमीन अधिग्रहण के बदले किसी को नौकरी देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए इस पर विचार करना मुमकिन नहीं है।
यह मामला मेरे पास आया था। जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। नौकरी देने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में एयपोर्ट अथॉरिटी को अवगत करा दिया गया है। -मदन कुमार, एसएलएओ