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एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा दांव पर लगाने का मामला

Tue, 26 Jan 2016 01:42 AM IST
बरेली
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बरेली। देश की सुरक्षा से जुड़े मसले पर भ्रष्टाचार और घूसखोरी की जोड़तोड़ इस कदर भारी पड़ी कि त्रिशूल एयरफोर्स स्टेशन के इर्द-गिर्द कॉलोनियां बनवा देने की 12 साल पहले हुई विजिलेंस जांच की रिपोर्ट तक दबकर रह गई। इस जांच में बीडीए के दो उपाध्यक्षों समेत पांच-छह अधिकारियों और एयरफोर्स के एक विंग कमांडर को दोषी करार दिया गया था मगर प्रदेश सरकार ने अपने अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मामले की एफआईआर दर्ज होने के बावजूद विंग कमांडर भी साफ बच निकला। यही नहीं, इसके बाद बीडीए और नगर निगम कार्यालय से विजिलेंस की जांच रिपोर्ट और उससे संबंधित फाइलें भी गायब हो गईं। विजिलेंस इन्हें बीडीए और नगर निगम कार्यालय में होना बताता है जबकि ये दोनों विभाग विजिलेंस के पास।
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एयरफोर्स स्टेशन त्रिशूल की बाउंड्रीवाल के आसपास अवैध निर्माण की शुरुआत सन् 1990 से हुई थी। बीडीए और नगर निगम के अफसरों की साठगांठ से दो साल के अंदर ही त्रिशूल के आसपास पांच-छह अवैध कालोनियों का निर्माण हो गया। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के अपर निदेशक रतीराम ने  10 नवंबर 2004 को दी अपनी जांच रिपोर्ट में एयरफोर्स स्टेशन के प्रतिबंधित दायरे में हुए अवैध निर्माण के लिए विजिलेंस टीम ने वायुसेना के विंग कमांडर योगेश सूरी को भी दोषी करार दिया था जिन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इन अवैध निर्माणों के लिए एनओसी जारी कर दी थी। जांच रिपोर्ट में पीर बहोड़ा की ग्रीन बेल्ट में अवैध कालोनी बनाए जाने का भी खुलासा किया गया जिसके लिए वायुसेना के विंग कमांडर ने 25 मई 1990 को एनओसी जारी की थी। इस एनओसी पर विवाद खड़ा हुआ तो इसे वापस ले लिया गया लेकिन बीडीए ने एनओसी वापस लेने के लिए भेजे गए पत्र को नजरंदाज करके कॉलोनी का नक्शा पास कर दिया।

विजिलेंस जांच में ये अफसर पाए गए थे दोषी
सन् 1990 से 1995 के बीच बीडीए में तैनात रहे उपाध्यक्ष एक्यू फारुखी और भगत सिंह वर्मा, तत्कालीन सहायक अभियंता एके राय, एमजेड अंसारी, अवर अभियंता अनिल कुमार सचान, कैलाश चंद्र वर्मा, सर्वेयर प्रदीप कुमार के साथ इसी दौरान बरेली नगर महापालिका में तैनात मुख्य नगर अधिकारी, सहायक मुख्य नगर अधिकारी और संबंधित संपत्ति लिपिक आदि को विजिलेंस की जांच में दोषी पाया गया था। जांच रिपोर्ट में त्रिशूल के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण के लिए बीडीए के अधिकारियों और विंग कमांडर योगेश सूरी को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराने के साथ भगवती सहकारी समिति, सन सिटी, कुर्मांचलनगर आदि कालोनियों को अवैध घोषित करने की सिफारिश भी की गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस इंस्पेक्टर प्रहलाद सिंह त्यागी की ओर से थाना इज्जतनगर में इस मामले की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। जैसे ही मामला ठंडा पड़ा, विजिलेंस की जांच रिपोर्ट और फाइलें भी गायब करा दी गईं। विंग कमांडर सूरी ने विजिलेंस जांच होने से पहले ही वीआरएस ले लिया था।
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