फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सालों बाद बरेली कॉलेज में ट्रायल पर खराब कोर्ट दुरुस्त नहीं कराया

विज्ञापन
बरेली कालेज में बास्केटबॉल का ट्रायल देते खिलाडी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन
बास्केटबाल की अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिता के लिए चुनी गई टीम
विज्ञापन

बरेली। बरेली कॉलेज में सालों बाद शुक्रवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय की अंतर महाविद्यालयीय बास्केटबाल प्रतियोगिता के लिए टीम के चयन के लिए ट्रायल हुए लेकिन खेल विभाग ने ट्रायल से पहले बास्केटबाल कोर्ट को दुरुस्त तक नहीं कराया गया। खिलाड़ियों को खराब कोर्ट पर जूझना पड़ा। इसमें में 35 खिलाड़ियों ने भाग लिया जिनमें से 12 का चयन कर लिया गया।
अंतर महाविद्यालयीय बास्केटबाल प्रतियोगिता आठ दिसंबर से मुरादाबाद में शुरू होगी। करीब दो साल बाद विश्वविद्यालय की ओर से यह पहली प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। महाविद्यालयों में चयन और ट्रायल शुरू हो गए हैं जिसकी वजह से लंबे समय से सूने पड़े खेल मैदानों में खिलाड़ी चयन के लिए जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं। कोरोना की वजह से दो सालों से महाविद्यालयों में एक भी खेल प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हुआ था।
विज्ञापन

बरेली कॉलेज में शुक्रवार को बास्केटबाल की पुरुष खिलाड़ियों की टीम के चयन के लिए ट्रायल का आयोजन किया गया। टीम में चुने गए 12 खिलाड़ियों में युवराज सिंह, राजकुमार गंगवार, रोहित कुमार, कोशिंद कुमार, अमन राजपुत, तुषार टमटा, शुभम सिंह, आदित्य यादव, संजय कुमार, तुषार सिंह, प्रशांत त्रिपाठी, आदित्य चिकारा शामिल हैं। बरेली कॉलेज के क्रीड़ा प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मुरादाबाद में आठ दिसंबर से होने वाली प्रतियोगिता में ये खिलाड़ी बरेली कॉलेज की टीम का हिस्सा होगे।
ट्रायल से पहले ठीक नहीं कराया कोर्ट, जूझना पड़ा खिलाड़ियों को
बरेली कॉलेज में प्रतियोगिताओं के लिए ट्रायल तो शुरू हो गए हैं लेकिन इससे पहले खराब पड़े खेल मैदान की हालत सुधारने के लिए कुछ नहीं किया गया है। शुक्रवार को बरेली कॉलेज में बास्केटबाल के ट्रायल में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का कहना था कि कॉलेज का कोर्ट पूरी तरह खराब है। बास्केट करने वाला नेट तक खराब है। उन्हें ट्रायल में काफी मुश्किल उठानी पड़ी।
खिलाड़ी बोले- बहुत दिन बाद मिला खेलने का मौका
कोरोनाकाल के बाद पहली बार किसी प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिल रहा है। कोरोना के दौर में लंबे समय तक खेलने का मौका न मिलने से खिलाड़ियों का मनोबल ही गिरने लगा था। - युवराज सिंह
कोरोना के कारण खेल पर भी काफी फर्क पड़ा है। अगर प्रतियोगिता लगातार होती है तो खिलाड़ियों को चुनौतियों से लड़ना आ जाता है लेकिन कोरोना की वजह से अभ्यास करने का मौका कम ही मिल पाता था। - शुभम सिंह
बड़ी प्रतियोगिताओं के कारण खेल में रुचि बनी रही है। इसी के साथ अच्छे खिलाड़ियों से परिचय होता है और सीखने को भी मिलता है। हालांकि कॉलेज में खेल के मैदानों की स्थिति अब भी खराब ही है। - तुषार
विज्ञापन

कोरोना के कारण काफी खिलाड़ियों ने खेलना छोड़ दिया है। अब प्रतियोगिता और ट्रायल में शामिल होने से खिलाड़ियों का मनोबल भी बढे़गा। प्रबंधन को कॉलेज का खेल मैदान भी ठीक कराना चाहिए। - अमन राजपूत
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें