बीडीए उपाध्यक्ष और किसान आमने-सामने, कई थानों की पुलिस पहुंची, अफसरों पर जबरन जमीन कब्जाने के लिए दबाव बनाने का आरोप
बीडीए ने कहा- ग्रीन बेल्ट में बनाया गया था ढाबा इसलिए ढहा दिया
किसान नेता का सवाल, बराबर के और ढाबों पर कार्रवाई क्यों नहीं
बरेली। बड़ा बाईपास पर दोनों ओर ग्रीन बेल्ट पर यूं तो सैकड़ों कब्जे हैं लेकिन शुक्रवार को अचानक बीडीए की टीम ने भारतीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुन्नालाल मिश्रा का ढाबा ध्वस्त कर दिया। किसान नेताओं ने इसे रामगंगानगर परियोजना में किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण के लिए दबाव बनाने की कार्रवाई करार देते हुए आसपास के कई गांवों के किसानों के साथ दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस की सख्ती के बाद करीब सवा घंटे बाद जाम खुल पाया।
रामगंगानगर परियोजना से बीडीए सैकड़ों करोड़ की कमाई कर चुका है लिहाजा इस आवासीय परियोजना का और विस्तार करने की योजना बनाई है। कुछ महीने पहले रामगंगानगर से सटे 12 गांवों में किसानों की जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। किसानों के जमीन देने से इनकार करने के बावजूद बीडीए के अफसर उन पर दबाव बनाते रहे। भारतीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुन्नालाल मिश्रा की अगुवाई में किसानों ने इसका जबर्दस्त विरोध किया। आखिरकार बीडीए के अफसरों को कदम पीछे खींचने पड़े। हालांकि अब भी बीडीए रामगंगानगर के विस्तार की योजना पर काम कर रहा है।
इसके बाद बीडीए अफसरों ने रामगंगानगर के आसपास बसे लोगों को बेदखल करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। अफसरों का कहना है कि इन लोगों ने रामगंगानगर की जमीन पर कब्जा किया हुआ है। मुन्नालाल मिश्रा इस मामले में भी बीडीए के खिलाफ ग्रामीणों की अगुवाई कर रहे हैं। शुक्रवार को अचानक बीडीए की टीम ने बड़ा बाईपास पर सैदपुर क्षेत्र में मुन्नालाल मिश्रा के ढाबे पर यह कहकर जेसीबी चलवा दी कि यह ढाबा ग्रीन बेल्ट में बना हुआ है। ढाबा तहस-नहस होने के बाद तमाम किसान इकट्ठे हो गए जिन्होंने किसान नेताओं की अगुवाई दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बैठकर जाम लगा दिया।
किसानों की मांग थी कि ढाबा तुड़वाने वाले बीडीए के जेई के खिलाफ एफआईआर लिखी जाए। इस दौरान इज्जतनगर, हाफिजगंज और भोजीपुरा थाने की पुलिस पहुंच गई। किसानों के उग्र होने पर पुलिस ने लाठी फटकार कर सख्ती दिखाई। बाद में उनसे बातचीत कर बीडीए के जेई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन देकर करीब सवा तीन बजे जाम खुलवा दिया।
बाल-बाल बचा किसान नेता का बेटा
मुन्नालाल मिश्रा ने आरोप लगाया कि बीडीए के अफसरों ने ढाबा तोड़ने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। जिस समय अचानक पहुंचकर बीडीए की टीम ने उनके ढाबे पर जेसीबी चलाई, उनका बेटा नीरज मिश्रा अंदर ढाबे में मौजूद था। ढाबा ध्वस्त करने की कार्रवाई के दौरान उसने किसी तरह खुद को बाहर निकालकर बचाया।
बीडीए की ज्यादती का विरोध कर रहा हूं इसलिए ढहा दिया ढाबा
रामगंगा आवासीय परियोजना में जबरन जमीन लेने की कोशिश किए जाने पर ग्रामीण बीडीए का विरोध कर रहे हैं। बीडीए उनके मकान तोड़कर उन्हें जबरन हटाना चाहता है। मेरा कहना है कि गरीबों के मकान नहीं तोड़ेे जाने चाहिए। उनके धरना प्रदर्शन को मैंने समर्थन दिया। बीडीए अफसरों ने मेरी आवाज दबाने के लिए मेरे ढाबे को गिरा दिया। बीडीए अफसर बताएं कि यदि मेरा ढाबा ग्रीन बेल्ट में है तो मेरे ढाबे के आसपास बने दूसरे ढाबों को क्यों नहीं तोड़ा गया है। वह भी तो ग्रीन बेल्ट में ही होंगे। साफ जाहिर है कि बीडीए ने बदले की भावना से मेरे खिलाफ कार्रवाई की है। - मुन्नालाल मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर संगठन
ये लोग किसान नहीं है, बीडीए अपनी जमीन पर कब्जा लेगा
हाईवे के किनारे ढाबे ग्रीन बेल्ट पर हैं। उन्हें बहुत दिनों से चिह्नित किया जा रहा है। जिस ढाबे पर कार्रवाई हुई है, उसे बहुत पहले चिह्नित किया जा चुका था। पुलिस फ ोर्स मिलने के बाद कार्रवाई की गई। ग्रीन बेल्ट पर बने और अवैध ढाबों, शोरूम और दुकानों को भी ध्वस्त करने की कार्रवाई होनी है। सब नियमानुसार हो रहा है। रामगंगा आवासीय परियोजना के मामले में जो लोग विरोध कर रहे हैं, वे किसान नहीं हैं। बीडीए जमीन का अधिग्रहण कर चुका है और मुआवजा भी दिया जा चुका है। वह बीडीए की जमीन है और बीडीए उस पर कब्जा लेगा। -जोगिंदर सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए
भाजपा विधायक ने लगाया था अफसरों पर बिल्डरों से साठगांठ का आरोप
बरेली। यह संयोग ही था कि जिस दिन प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए 12 हजार करोड़ की योजना की घोषणा की, उसके अगले ही दिन बीडीए ने किसान नेता का ढाबा गिराकर किसानों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर कर दिया। दरअसल, किसानों और बीडीए के अफसरों के बीच कई महीनों से टकराव चल रहा है। बीडीए अफसर रामगंगानगर परियोजना का विस्तार करने के लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं, इसीलिए उनकी नजर किसानों की जमीन पर है। रामगंगानगर परियोजना से सटे गांव चंदपुर बिजपुरी, डोहरिया, अब्दुलापुर माफी, कलारी लालपुर, इटौआ बेनीराम, मोहनपुर उर्फ रामनगर, अहरौला, बालीपुर अहमद, नहरिया, नवदिया झादा, कचौली के किसानों का आरोप है कि बीडीए पहले ही उनकी काफी जमीन कब्जा चुका है। वे बचीखुची जमीन भी दे देंगे तो गुजारा कैसे करेंगे। तीन महीने पहले किसानों ने बीडीए के विरोध में कमिश्नरी आकर जोरदार विरोध प्रदर्शन भी किया था। इस दौरान बिथरी विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल ने भी आरोप लगाया था कि बिल्डरों से साठगांठ के कारण बीडीए किसानों पर जमीन देने का दबाव बना रहा है।