आरटीओ बोले, ज्यादा वसूली की शिकायत आई तो संबंधित डीलर पर होगी कार्रवाई
बरेली। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के मनमाने दाम तय करना डीलरों को भारी पड़ा तो वह बैकफुट पर आ गए। अफसरों ने चेतावनी देते हुए डीलरों को निर्धारित दरों पर ही नंबर प्लेट देने के निर्देश दिए हैं। भविष्य में मनमानी की सूचना पर सघन जांच और नियमानुसार कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है। इस बीच ट्रांसपोर्टर्स और डीलरों के बीच जमकर नोंकझोंक के बाद अफसरों की मौजूदगी में दरें निर्धारित की गईं।
करीब हफ्ते भर पहले शासन की ओर से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए थे, जिसे सोमवार से आरटीओ ने तत्काल लागू करा दिया। हफ्ते भर का समय देते हुए सोमवार से नंबर प्लेट नियमानुसार न लगे पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही थी, जिसके बाद ट्रांसपोर्टर्स ने आनन-फानन में नंबर प्लेट लगवाने के लिए डीलरों से संपर्क साधा।
आपदा को अवसर में बदलने की बाट जोह रहे डीलरों ने बमुश्किल पांच सौ रुपये तक में लगने वाली नंबर प्लेट के पांच गुना से ज्यादा दाम मांग लिए। मामला ट्रांसपोर्टर्स तक पहुंचा तो उन्होंने रविवार को अहम बैठक कर इसका विरोध करने का निर्णय लिया। मामले की जानकारी होने पर आरटीओ ने अफसरों की सोमवार को एक बैठक बुलाई, जिसमें संबंधित डीलर भी मौजूद रहे। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में ट्रांसपोर्टर्स और डीलरों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। आखिर में शासनादेश के तहत तय रेट लागू करने का निर्णय हुआ। फैसले के मुताबिक, ट्रकों और बसों की नंबर प्लेट के लिए एक हजार, ऑटो के लिए नौ सौ और बाइक के लिए पांच सौ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
एआरटीओ प्रशासन आरपी सिंह ने तत्काल प्रभाव से नई दर तय कर नंबर प्लेट लगाने के निर्देश डीलरों को दिए हैं। इस दौरान ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शोभित सक्सेना, अमर जीत सिंह बख्शी, दानिश जमाल, शोएब खान व अन्य मौजूद रहे।
पसरा रहा सन्नाटा, जो पहुंचे लौटाए गए
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और डीलर के डिजिटल सिग्नेचर के बगैर सोमवार को आरटीओ पहुंचने वालों को वापस कर दिया गया। हालांकि इस बाबत सूचना सार्वजनिक होने की वजह से आम दिनों की अपेक्षा इक्का दुक्का लोग ही वाहन संबंधी कार्य लेकर पहुंचे थे। एआरटीओ आरपी सिंह ने बताया अब वाहन संबंधी कार्य ऑनलाइन होने हैं। इसके लिए डीलरों के डिजिटल सिग्नेचर अपलोड और अपडेट होने के बाद ही कामकाज संभव हो सकेगा। वहीं एचएसआरपी के न होने से भी तमाम कार्य नहीं हो रहे हैं।