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बरेली में सेहत से खिलवाड़: पेट और आंतों में जख्म दे रहा मिलावटी खाद्य तेल, 172 नमूनों में से 66 फेल

Sun, 19 Jul 2026 08:21 PM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बाजार में मिलावटी खाद्य तेल भी बिक रहा है। यह तेल आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। बरेली में पिछले 15 महीने में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने विभिन्न ब्रांडों के तेल के 172 नमूने लिए थे। इनमें से जांच में 66 फेल पाए गए।  
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बरेली जिले में खाद्य तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट का कारोबार चल रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पिछले 15 माह में लिए गए 172 नमूनों में से 66 फेल पाए गए। इन नमूनों को मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी बताया गया है। स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी फर्मों और गोदामों से करोड़ों रुपये का मिलावटी तेल बेचा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मिलावटी तेल का सबसे अधिक दुष्प्रभाव पेट और आंतों पर पड़ रहा है, जबकि लंबे समय तक सेवन करने पर लीवर और किडनी भी प्रभावित हो सकती हैं।

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खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पिछले 15 माह में कुल 172 नमूने लिए गए, जिनमें 66 फेल या हानिकारक मिले। इन मामलों में न्यायालय में सुनवाई हुई। अब तक 38 मामलों का निस्तारण हो चुका है। दोषियों पर 22.84 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में सामने आया कि फेल होने वाले अधिकांश नमूने स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे ब्रांडों के हैं। इनमें ऐसे तत्व मिले हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। 

इन ब्रांडों के नमूने हुए फेल 
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 138 नमूने लिए गए थे। इनमें से 58 नमूने फेल और चार नमूने मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 35 नमूने लिए गए हैं, जिनमें से 27 की रिपोर्ट आ चुकी है। इन 27 नमूनों में से तीन फेल और एक हानिकारक पाया गया है। फेल हुए ब्रांडों में तिल ऑयल किंग तिल प्योर, राजहंस सोया हेल्थ, समृद्धि, न्यूट्रीप्लस, चक्र, क्लासिक, खिलौना ब्रांड, पंकीजा गोल्ड, माउंटेन गोल्ड और साथिया ब्रांड शामिल हैं।
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जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के लगातार सेवन से पेट और आंतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा लीवर और किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने सलाह दी कि यदि संभव हो तो सरसों खरीदकर पेरवाकर ही उसका तेल उपयोग करें।

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जांच में पाया जाता है यह
सरसों के तेल में हाइड्रोक्लोरिक एसिड नीचे साफ दिखता है और इसमें किसी भी तरह का रंग नहीं बदलता है तो ये शुद्ध तेल है, अगर मिलावटी तेल होगा तो इससे हाइड्रोक्लारिक एसिड के रंग में परिवर्तन दिखाई देगा।

सहायक आयुक्त खाद्य राहुल सिंह ने बताया कि विभाग नियमित अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेता है। सबसे अधिक दूध से बने उत्पाद और खाद्य तेल के नमूने फेल होते हैं। जांच में कई स्थानीय ब्रांडों के तेल मानक पर खरे नहीं उतरे और कुछ नमूने स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी पाए गए।
 
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