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Bareilly News: आदिगंगा को भगीरथ की तलाश, मिलें तो बुझे विकास की प्यास

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बरेली। मैं गोमती हूं। वेदों, पुराणों ने मोक्षदायिनी आदिगंगा के रूप में मेरा बखान किया है। मेरा उद्गम भू स्रोतों से हुआ है और विलय पवित्र गंगा में। राम-कृष्ण की धरा पर मेरी धारा कहीं निर्मल है तो कहीं मैली भी है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ को मैं अपने स्नेह से सिंचित करती हूं। मेरे प्रवाह कल-कल हर पल उद्गम स्थल को संवारने की दुहाई देता है, पर शायद मेरी आवाज राजधानी के कोलाहल में दब जाती है। मुझे आज भी भगीरथ की तलाश है। वह मिलें तो मेरे उद्गम स्थल के विकास की प्यास बुझे।
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बरेली। पीलीभीत के माधोटांडा की फुलहर झील से निकलने वाली गोमती नदी की यह अव्यक्त पीड़ा है। वह बोल पाती तो शायद कुछ ऐसे ही शब्द निकलते। उद्गम स्थल पर बनाए गए मंदिर में दोनों पहर आरती होती है। श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर परिसर का विस्तार हो रहा है, लेकिन कुछ वर्ष पहले संवारे गए जलस्रोत क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। पाथ वे पर लगीं ईंटें उखड़ रही हैं। लाइटें खराब हो रही हैं। कहीं बल्ब टूट गए हैं तो कहीं लैंप टूटकर लटके हैं। झूलों पर जंग लग रही है। पार्क की दीवारें गिर रही हैं और गेट भी टूट रहे हैं। झील के जल का स्पर्श करने के लिए बनीं सीढि़यों पर गंदगी की भरमार है। लोग वहां कूड़ा डालते हैं। उसे साफ करने की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं।
आंखें मूंदे हैं जिम्मेदार
इस समय प्रदेश के विभिन्न पाैराणिक स्थल संवारे जा रहे हैं, पर इस ओर शासन की नजर नहीं पड़ रही। गोमती नदी के उद्गम स्थल तक पहुंचने का रास्ता जर्जर है। सड़क जगह-जगह टूटी हुई है। एक हिस्सा तो अधूरा ही रह गया है। सड़क पर बना मुख्य द्वार पुराना है। जिम्मेदार अफसरों ने आंखें मूंद रखीं हैं। पूर्व में जिलाधिकारियों ने प्रयास किए थे। बाद में अफसर बदले तो उनकी प्राथमिकता भी बदल गईं।
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कई जिलों से गुजरती है 960 किलोमीटर लंबी प्रवाह यात्रा
गोमती नदी पीलीभीत जिले से निकलकर शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, सुल्तानपुर, जाैनपुर होते हुए वाराणसी के निकट मार्कंडेश्वर आश्रम के पास गंगा में मिलती है। कई जिलों की कृषि योग्य भूमि की सिंचाई इसी के जल पर निर्भर है।
बहुउद्देशीय हॉल व यात्री शेड बना, पुल, सड़क का काम अधूरा
गोमती उद्गम स्थल पर पर्यटन विभाग ने करीब ढ़ाई करोड़ रुपये खर्च करके बहुउद्देशीय हाॅल बनवाया है। 48 लाख रुपये से यात्री शेड बना है। करीब डेढ़ करोड़ की लागत से दो साल से बन रहा पुल अब तक पूरा नहीं हाे सका है। उद्गम स्थल पर सुंदरीकरण के ज्यादातर काम दान दाताओं ने कराए हैं। फर्श, लाइटें आदि लगवाने का काम दान की धनराशि से हुआ है। यहां रोजाना होने वाली आरती का खर्च भी एक संस्था से जुड़े लोग उठाते हैं।
मुख्यमंत्री तक पहुंचे बात तो हो भला
गोमती नदी उद्गम स्थल पुनरुद्धार एवं बाबा दुर्गा नाथ मठ सेवा ट्रस्ट के सदस्य माधोटांडा निवासी निर्भय सिंह का कहना है कि गोमती से पीलीभीत की पहचान है। मुख्यमंत्री इस क्षेत्र में आए थे तो उन्होंने भी मां गोमती को नमन किया था। पूर्व में अधिकारियों की पहल पर इसे संवारने के प्रयास हुए हैं, लेकिन वे अपर्याप्त हैं। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से लगातार मांग की जा रही है। मुख्यमंत्री तक बात पहुंंचे तो शायद इसे और बेहतर तरीके से संवारा जा सके।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो स्थल
पूर्व प्रधान, जिला गंगा समिति व गोमती नदी उद्गम स्थल पुनरुद्धार ट्रस्ट के सदस्य राममूर्ति सिंह का कहना है कि इसको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सरकार को यहां होने वाले आयोजनों के लिए अनुदान देना चाहिए। तीन साल से प्रस्तावित सड़क बनवाई जाए। यह स्थल आकर्षक होगा तो लोग भी यहां आएंगे।

ये काम जरूरी
- माधोटांडा-पूरनपुर हाईवे से गोमती उद्गम स्थल जाने वाले खराब लिंक मार्ग को ठीक कराया जाए। यह मात्र तीन मीटर चाैड़ा है। विशेष आयोजनों के दौरान आवागमन में दिक्कत होती है।
- पीलीभीत टाइगर सफारी का संचालन गोमती उद्गम तीर्थ स्थल माधोटांडा से भी कराया जा सकता है। यहां पर्यटकों के लिए टेंट सिटी बनाई जा सकती है।
- यहां पहुंचने के लिए जगह-जगह (बरेली हाईवे, असम हाईवे, पूरनपुर-खटीमा हाईवे ,माधोटांडा-पीलीभीत हाईवे पर) बोर्ड लगवाए जा सकते हैं।
- मां गोमती महोत्सव को राजकीय अनुदानित महोत्सव का दर्जा मिले।
- माधोटांडा में थाने के पास गोमती चौराहे को बनवाया जा सकता है।
- खारजा नहर के पुल के पास कलीनगर, खटीमा-माधोटांडा-पूरनपुर तिराहे पर गोमती पार्क बनाया जा सकता है।
- गोमती उद्गम तीर्थ स्थल पर इको पार्क बनाया जा सकता है।
- गोमती उद्गम झील में कछुओं की संख्या बहुत है। कछुआ संरक्षण केंद्र भी बनाया जा सकता है।
- गोमती उद्गम की झील में कई पक्षी कलरव करते हैं। इसे पक्षी विहार के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
- नैनीताल की नैनी झील में जिस तरह से पर्यटकों के लिए नौका विहार की व्यवस्था है, वैसे ही यहां भी व्यवस्था की जा सकती है।
- माधोटांडा को गोमती उद्गम काॅरिडोर के रूप में विकसित किया जा सकता है।
अमर उजाला ब्यूरो



गोमती उद्गम स्थल पर बना बहुउद्देशीय हाॅल हैंडओवर हो चुका है। पहुंच मार्ग और अन्य व्यवस्थाओं को दिखवाया जाएगा। सुधार कराया जाएगा। – संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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