शनिवार को इज्जतनगर थाना क्षेत्र में ओवर लोडेड टेंपो पलटने से किशोर समेत दो लोगों की मौत हो गई। टेंपो में सवार दस लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल शहर के अलग अलग अस्पतालों में भर्ती कराये गए। दुर्घटनाग्रस्त टेंपो में अंदर और बाहर करीब 20 यात्री लटके हुए थे, जबकि आठ की क्षमता है।
शनिवार को रिठौरा में साप्ताहिक बाजार था। इज्जतनगर क्षेत्र के गांव भगवानपुर धीमरी से कई टेंपो रिठौरा के लिए चलते हैं। सुबह करीब 10 बजे एक टेंपो ठसाठस भरने के बाद नहर के रास्ते रिठौरा बाजार आ रहा था। पीलीभीत हाईवे के पास टेंपो बरकापुर गांव के पास पलट गया। बाजार आने वाले लोगों ने दुर्घटनाग्रस्त टेंपो फ ंसे लोगों को बाहर निकाला ।
टेंपो में सवार भगवानपुर धीमरी के साबिर अली के 13 वर्षीय पुत्र फैजुन और इसी गांव के बुजुर्ग नसरुद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई। टेंपो पलटते ही चालक फरार हो गया। इज्जतनगर एसओ कमल सिंह ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल भिजवाया। घायलों में मुड़िया अहमदनगर निवासी रियाज बी, मोइन, महमूद, आयशा, इसरार हैं।
नहर में नहाते फैजुन को मौत खींच लाई
रिठौरा। साबिर अली की पत्नी आयशा इस टेंपो से नवाबगंज में अपनी बीमार बहन शहाना को देखने जा रही थीं। उनका बेटा फैजुन टेंपो के पास नहर में ही नहा रहा था। उसने अपनी मां को देखा तो कपडे़ पहनकर जबरन टेंपो में बैठ गया। आयशा ने कई बार उसे टेंपो से उतारना चाहा लेकिन वह नहीं उतरा। आखिर उसने बेटे को अपने साथ बैठा लिया। करीब छह किमी आगे आकर टेंपो पलट गया। घायल आयशा कह रही थी कि काश बेटा मान जाता तो उसकी जान बच जाती। वह सातवीं कक्षा का छात्र था। नसरुद्दीन अपने बेटे ताहिर को साथ लेकर रिठौरा में दवा लेने जा रहे थे। ताहिर भी हादसे में घायल हुआ।
ये टेंपो हैं या मौत के परकाले
बरेली। जिले में डग्गामार वाहनों से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। कंडम और अनियंत्रित ओवरलोड टेंपो से हो रही मौतों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। पांच दिन पहले बहेड़ी में टेंपो का टायर फट गया और टेंपो खाई में पलट गया। इससे सात साल के कासिफ और 17 साल की अंजुम की मौत हो गई थी। पिछले महीने भोजीपुरा में ओवरलोड टेंपो टायर फटने से पलटा। इसमें बैठी सपा नेत्री की मौत हो गई थी। इससे पहले सोलह मई को हाफिजगंज के रिठौरा में छात्र प्रियांशु की ऐसे ही टेंपो से गिरकर मौत हो गई थी। पिछली साल 14 अक्तूबर को शाहजहांपुर हाईवे पर ओवरलोड टेंपो टकराने से सात लोगों की मौत के बाद जिले में बड़े पैमाने पर डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। कुछ दिन जागरूकता अभियान के बाद स्थिति फिर गड़बड़ हो गई।