बरेली। स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट विजेंद्र त्रिपाठी ने किला थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले के निवासी व्यक्ति को शुक्रवार को दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया। रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला ने कोर्ट में कहा कि अब वह और आरोपी पति-पत्नी हैं। उनकी नौ वर्ष की बेटी भी है। परिवार के साथ राजी-खुशी रह रही है और मुकदमा खत्म करना चाहती है।
किला थाने में आठ मई 2025 को एक युवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पड़ोसी युवक से उसके परिवार के अच्छे ताल्लुकात थे। छह सितंबर 2010 को पड़ोसी की नानी और मौसी उसे गाजियाबाद ले गई। वहां युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। शादी का झांसा देकर पांच साल तक दुष्कर्म करता रहा। वह गर्भवती हो गई तो शादी से इन्कार कर दिया। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी।
सुनवाई के दौरान युवती ने कोर्ट में कहा कि शादी का दबाव बनाने के लिए उसने दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उसे मुआवजे के रूप में 20 हजार रुपये भी मिले, लेकिन अब उसने युवक से शादी कर ली है। युवती ने कोर्ट में कहा कि पहले के बयान उसने परिवार वालों के दबाव में दिए थे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।