बरेली। स्कूल वाहन मंगलवार को भी नहीं चले। अभिभावकों को खुद ही बच्चों को लेकर स्कूल दौड़ना पड़ा। स्कूल वाहन न चलने का असर स्कूलों में उपस्थिति पर भी साफ दिखा। खासतौर पर दूरदराज के स्कूलों में नाममात्र की तादाद में ही बच्चे पहुंचे। बीबीएल की पीलीभीत रोड ब्रांच में मंगलवार को सिर्फ चार बच्चे ही स्कूल पहुंचे।
स्कूल वाहनों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक मानक सुनिश्चित कराने को पुलिस और प्रशासन ने सोमवार को अभियान शुरू किया था। इस पर स्कूल वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियां खड़ी कर दीं। मंगलवार को भी वे हड़ताल पर रहे। बगैर पूर्व सूचना इस हड़ताल से स्कूल जाने को तैयार बच्चे गाड़ी का इंतजार करते रहे। हरुनगला की बीडीए कॉलोनी में रहने वाले राधा माधव स्कूल के विद्यार्थी सौरभ, जया और कोमल मंगलवार को स्कूल नहीं जा पाए। सेक्रेट हार्ट स्कूल में आठवीं में पढ़ने वाले मलूकपुर के नावेद खां ने बताया कि उन्हें लेने सुबह स्कूल बस नहीं पहुंची। उनके पिता उन्हें स्कूल छोड़कर आए। कुछ वाहन चालक और रिक्शे वाले हड़ताल से दूर रहे।
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बच्चे न आए तो अभिभावक जिम्मेदार
सेंट मारिया गोरेटी स्कूल के प्रबंधन ने बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने की जिम्मेदारी अभिभावकों पर ही डाल दी है। नोटिस जारी किया है कि अगर हड़ताल के दौरान कोई भी बच्चा स्कूल नहीं आता है और उसकी पढ़ाई छूटती है तो उसके अभिभावक ही इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
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आज से खुलेगा एसआर इंटरनेशनल
स्कूल वाहनों की हड़ताल की वजह से एसआर इंटरनेशनल स्कूल मंगलवार को बंद रहा, लेकिन यह बुधवार से स्कूल खुलेगा। बीबीएल के प्रिंसिपल ने कहा है कि अगर बस समय पर आती है तो बच्चे स्कूल आ जाएं। अगर बस नहीं पहुंच पा रही है तो वे स्कूल न जाएं।
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स्कूल वाहन चालकों की हड़ताल चोरी और सीनाजोरी जैसी है। यह गैरजिम्मेदाराना और नाजायज है। प्रशासन की कार्रवाई सही है, लेकिन यह कार्रवाई लगातार होनी चाहिए। वैसे भी वाहन चालक अभिभावकों से अतिरिक्त रुपये वसूलते हैं और मनमानी करते हैं।-मोहम्मद खालिद जीलानी, संयोजक पैरेंट्स फोरम