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परिवार के साथ सुख-दुख बांट सकेंगे कैदी

Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
Bareilly
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बरेली। जेलों में कैद लोगों को भी अब अपनों के साथ सुख-दुख बांटने का मौका मिलेगा। पांच साल बाद शासन ने कैदियों को फिर पैरोल पर रिहा करने का फैसला किया है। परिजनों की शादी या अंत्येष्टि जैसे मौकों पर उन्हें तीन दिन के लिए पैरोल पर रिहा किया जाएगा। रविवार को आईजी जेल राजेश प्रताप सिंह ने सेंट्रल जेल में इस बारे में बताया।
आईजी ने बताया कि वर्ष 2007 में शासन ने शादी में शामिल होने के लिए पैरोल पर रिहाई बंद कर दी थी। पैरोल पर रिहाई के लिए आवेदन इसके बाद जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और फिर राज्यपाल को भेजने होते थे, लेकिन इन पर फैसला होने में काफी वक्त लग जाता था। ऐसे में आवेदन करने वाले सभी कैदियों को अपनों की शादी में शामिल होने का मौका नहीं मिल पाता था। अब शासन के नए आदेश के बाद हर कैदी को अपने किसी परिजन की शादी में शामिल होने के लिए पैरोल पर तीन दिन की रिहाई मिलेगी। इसके अलावा परिवार में किसी की अंत्येष्टि जैसे मौकों पर भी उन्हें तीन दिन के लिए रिहा किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि बुजुर्ग और 14 साल से ज्यादा सजा काट चुके कैदियों की रिहाई के लिए भी साल में तीन बार जेल में कमेटी की बैठक होगी। इसमें खुद डीएम और एसएसपी जेल जाकर सारी स्थितियों की जांच करेंगे। हर साल जनवरी, मई और सितंबर माह में इस तरह के सत्यापन होंगे। वे कैदियों को खुद देखकर फैसला करेंगे इसलिए उनकी रिहाई का रास्ता आसान हो जाएगा। पहले कैदी के सामने न होने से अक्सर रिपोर्ट दे दी जाती थी कि उनके बाहर जाने से समाज को खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि अगले महीने तक बंदी रक्षकों की रुकी प्रमोशन लिस्ट भी जारी हो जाएगी। सेंट्रल जेल के करीब 35 बंदी रक्षकों को इसका लाभ मिलेगा।
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