बरेली। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत जुलाई में वन विभाग को मिली 77 लाख की राशि खर्च नहीं हो सकी। इसका खुलासा शासन को भेजी गई रिपोर्ट में हुआ। अब वन विभाग से इस राशि को तत्काल खर्च करने को कहा गया है। साथ ही इसके खर्च करने की शासन ने रिपोर्ट भी मांगी है।
मनरेगा के तहत जिला स्तर पर विभिन्न विभागों को योजनाओं में हर महीने खर्च करने के लिए बजट का आवंटन किया जाता है। इसके बावजूद वन विभाग को पेड़-पौधे लगाने के लिए मिली धनराशि खर्च ही नहीं हुई। दरअसल, मनरेगा का बजट ग्राम पंचायतों के लिए अलग-अलग मदों में जारी किया जाता है, जबकि जिला स्तर पर विभिन्न विभागों, कृषि, सिंचाई, वन और बाढ़ खंड आदि के मदों में अलग से बजट जारी होता है। इसी के तहत वन विभाग को 77 लाख रुपये मिले थे। वन विभाग ने इस बजट से कुछ भी नहीं खर्च किया। प्रमुख सचिव ने वन विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर इस राशि को तत्काल खर्च करने के निर्देश दिए हैं।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर रामनरेश ने बताया कि वन विभाग की ओर से हमें जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसमें मनरेगा के बजट में खर्च दिखाया गया है। उसे शासन को भी भेजा गया है। ये धनराशि कितनी खर्च की गई है, यह आनलाइन फीडिंग देखने के बाद ही पता चलेगा।
प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) धर्म सिंह से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने शहर में न होने की बात कहकर फोन काट दिया।