बरेली। श्री मठ तुलसी स्थल पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास पं. प्रखर मिश्रा ने कहा कि जीवात्मा रूपी गोपी का परमात्मा श्रीकृष्ण से मिलने का नाम ही रास है। इसको काम विजय लीला भी कहा जाता है। इस रास में स्वयं भगवान शिव भी पधारे। जो इस रास कथा का नित्य पाठ करते हैं, उनके हृदय की वेदना भगवान दूर करते हैं।
कथा व्यास ने कंस उद्धार और रुक्मणि मंगल की कथा भी सुनाई। कहा कि जो व्यक्ति अपनेे माता-पिता को कष्ट देता है, गुरुजनों, संतों का अनादर करता है तथा भगवान से द्वेष रखता है, वही कंस है। ऐसे दुष्टों का संहार करने को ही भगवान अवतार लेते हैं। कथा के बाद आरती व प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर महंत केशवदास, अमित अरोड़ा, रामगोपाल मिश्रा, अजीत पाठक, इंद्रदेव त्रिवेदी, शिव कुमार गौड़ और शन्नो देवी आदि उपस्थित रहे।