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केवी जेएलए- 2 में दो के बजाय साढ़े तीन घंटे में निपटी एएफएमसी की प्रवेश परीक्षा
सेना के अफसरों ने वजह बताने से किया इनकार
सिटी रिपोर्टर
बरेली। आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) की प्रवेश परीक्षा के लिए यूं समय तो दो घंटे का नियत था, लेकिन केंद्रीय विद्यालय जेएलए- 2 में परीक्षार्थियों को परीक्षा देने के बाद करीब डेढ़ घंटे बंद रहना पड़ा। करीब साढ़े तीन घंटे बाद उन्हें परीक्षा कक्ष से बाहर निकलने दिया गया। इसकी वजह भी उन्हें नहीं बताई गई। सेना के अफसरों ने भी इस बारे में कुछ बोलने से इनकार कर दिया।
रविवार को केंद्रीय विद्यालय जेआरसी, जेएलए-2 और एअरफोर्स स्कूल समेत तीन केंद्रों पर एएफएमसी की परीक्षा हुई। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से 12 बजे था। जेआरसी और एअरफोर्स स्कूल में यह परीक्षा नियत समय पर छूट गई, लेकिन जेएलए-2 में परीक्षा दे रहे करीब पौने तीन सौ अभ्यर्थी 12 बजे के बाद भी बाहर नहीं निकले। इस परीक्षा केंद्र पर तमाम अभ्यर्थी रामपुर, शाहजहांपुर, जेपीनगर, मुरादाबाद आदि जिलों से भी परीक्षा देने पहुंचे थे। उनके अभिभावक बाहर खड़े उनका इंतजार कर रहे थे। जब परीक्षार्थी एक घंटे बाद भी बाहर नहीं निकले तो उनका सब्र जवाब देने लगा। उन्होंने परीक्षा केंद्र पर मौजूद सेना के अफसरों से वजह जानने की कोशिश की तो कोई वजह भी नहीं बताई गई। इससे वे और परेशान हो गए।
रामपुर से आए एक अभिभावक ने बताया कि सेना के लोगों ने काफी रूखे ढंग का व्यवहार किया। अभ्यर्थियों को सुबह नौ बजे परीक्षा केंद्र पर पहुंचने को कहा गया था। नौ बजे परीक्षा केंद्र में घुसे अभ्यर्थी करीब डेढ़ बजे बाहर निकले। अमर उजाला ने भी सेना के अफसरों से अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में डेढ़ घंटा ज्यादा समय तक रोकने की वजह जाननी चाही, लेकिन पहले तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। फिर बताया कि कॉपियों को अभ्यर्थियों की मौजूदगी में ही सील करने की वजह से देरी हुई। कॉपियों को अभ्यर्थियों के सामने क्यों सील किया गया और दूसरे परीक्षा केंद्रों पर ऐसा क्यों नहीं हुआ, सेना के अफसरों से इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिला। परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने इतना जरूर बताया कि कुछ अभ्यर्थियों की कॉपियों में गलत एंट्री मिली थी। इसके बाद अंदर सभी कॉपियों को चेक किया गया और चेकिंग पूरी होने तक किसी को बाहर नहीं निकलने दिया गया। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा ड्यूटी में तैनात थाना कैंट के सब इंस्पेक्टर इसरार खान को भी सिर्फ यही जानकारी थी कि कुछ अभ्यर्थियों के कॉपियों में गलत एंट्री कर देने की वजह से सभी अभ्यर्थियों को रोक लिया गया था।
‘कापियों को विद्यार्थियों के सामने ही सील करने की वजह से देरी हुई। यह करना इसलिए जरूरी था, जिससे विद्यार्थियों के मन में कोई संदेह न रह जाए। यह विद्यार्थियों के भले के लिए किया गया था।’ कर्नल योगेंद्र सिंह, स्टेशन इंचार्ज