फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीसरी कोशिश ने दिलाई कामयाबी

Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
Bareilly
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के अमित अरोड़ा बने आईएएस अधिकारी
विज्ञापन

सिटी रिपोर्टर
बरेली। आईआईटी मुंबई से कम्प्यूटर साइंस में एमटेक करने के बाद बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी ने 22 लाख का पैकेज ऑफर किया था। मगर, सिविल सेवा में जाने के लिए अमित अरोड़ा ने इस नौकरी को ठुकरा दिया। अमित सिविल सेवा परीक्षा-2011 में सेलेक्ट हो गए और उनकी ऑल इंडिया 32वीं रैंक है। उन्होंने यह कामयाबी तीसरे प्रयास में हासिल किया है। अमित ने हाईस्कूल की पढ़ाई हार्टमैन कॉलेज से पूरी की। इसके बाद इंटरमीडिएट कोटा (राजस्थान) से किया। अमित को इंजीनियरिंग करना था। सो, उन्होंने जेईई की परीक्षा दी और आईआईटी मुंबई के लिए सेलेक्ट हो गए। वहीं से बीटेक किया और फिर एमटेक की डिग्री भी हासिल की।
दरअसल, उन्हें तो इंजीनियर बनने का जुनून था, इसीलिए वह कोटा गए और बाद में आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। मगर, बीटेक फाइनल में पहुंचने के बाद अमित का मूड सिविल सेवा में जाने बन रहा था। उन्होंने इसकी पूरी योजना बनाई और अपने अभिभावकों को बताया। उनके पिता ने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी ठुकराने से पहले उनसे इस पर विचार करने को कहा था। मगर, अमित सिविल सेवा में जाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुके थे। उन्होंने इसके लिए अभिभावकों को भी सहमत कर लिया और सिविल की तैयारी करने दिल्ली पहुंच गए। कुल जमा ढाई साल की मेहनत ने उन्हें आईएएस बना दिया। अपने दूसरे प्रयास में ही इंटरव्यू तक पहुंचे थे अमित। मगर, उन्हें पिछली बार निराश होना पड़ा था।
विज्ञापन


इंटरव्यू में काम आया इंजीनियरिंग बैकग्राउंड
इंटरव्यू में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड अमित के काफी काम आया। उनका इंटरव्यू विजय सिंह के बोर्ड में हुआ। इसमें उनका इंजीनियरिंग बैकग्राउंड काफी काम आया। उनसे मुंबई आईआईटी, उच्चशिक्षा की दशा और समस्याओं से संबंधित सवाल पूछे गए। आईआईटी मुंबई में स्लम के बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था ‘अभ्यासिका’ में काम किया था। इस पर बोर्ड ने उनसे मलिन बस्तियों धारावी और गिरवानी के बारे में सवाल किए। वहां रह रहे लोगों और उनके बच्चों की स्थिति में किस तरह से सुधार किया जा सकता है। इंटरव्यू में सफल होने के सवाल पर अमित ने बताया कि यह दरअसल, आपके व्यक्तित्व का परीक्षण होता है। इसमें बोर्ड देखता है कि एक जागरूक नागरिक को जितनी जानकारी अपने आसपास के बारे में होनी चाहिए। अभ्यर्थी को उतनी जानकारी है या नहीं।
विज्ञापन

जिंदगी में संतोष और सुकून पैसे से ज्यादा अहम
मल्टीनेशनल की अच्छी खासी जॉब को छोड़कर सिविल में जाने का फैसला क्यों किया। इस सवाल पर अमित कहते हैं, जिंदगी में संतोष और सुकून की अहमियत पैसे से ज्यादा है। जिंदगी में एक ऐसा वक्त आता है, जब पैसा नगण्य हो जाता है। यह उन्होंने अपने रिटायर्ड बैंकर पिता अवतार नाथ अरोड़ा से सीखा है। उनकी मां उषा अरोड़ा भी बैंकर हैं, वह विजया बैंक में सहायक प्रबंधक हैं। प्रेमनगर के रहने वाले अमित की आईएएस के तौर पर काम करने की पहली प्राथमिकता उत्तर प्रदेश है और दूसरी उत्तराखंड।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें