परिस्थितिजन्य साक्ष्य पुलिस के दावे के खिलाफ
सिटी रिपोर्टर
बरेली। आकाशपुरम कॉलोनी में करीब दो महीने पहले हुई बीएड छात्र हृदयेश गौतम की मौत के रहस्य की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। सीओ की जांच में हृदयेश के आत्महत्या करने के पुलिस के दावे की हवा निकलती दिख रही है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य इसे साफ तौर पर हत्या का मामला बता रहे हैं, लेकिन पुलिस को इस मामले में और साक्ष्यों की भी तलाश है।
हृदयेश कुमार गौतम उर्फ पप्पू मूल रूप से बीसलपुर (पीलीभीत) के मोहल्ला पटेल नगर के रहने वाले थे। वह यहां आकाशपुरम कॉलोनी में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। यहीं एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही एक छात्रा से उनके प्रेम संबंध थे। 13 मार्च की शाम को हृदयेश की लाश उनके कमरे में लटकी मिली थी। बारादरी पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया, लेकिन पोस्टमार्टम से पता चला कि हृदयेश की गला दबाकर हत्या की गई है। इसके बाद हृदयेश के पिता रामप्रसाद ने थाना बारादरी में उनकी प्रेमिका और उसके पिता समेत तीन लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस इसके बाद छात्रा की तलाश में मेडिकल कॉलेज पहुंची तो पता चला कि वह वहां से जा चुकी है। इसी दौरान इस मुकदमे की तफ्तीश सीओ सिटी ओमप्रकाश यादव को दे दी गई। सीओ की अभी तक की तफ्तीश में हृदयेश के आत्महत्या करने का पुलिस का दावा झूठा साबित होता दिख रहा है। तफ्तीश के मुताबिक कमरे में लटकी हृदयेश की लाश के पैर बेड के ऊपर टिके हुए थे और शरीर कुर्सी पर था। गले में लगा परदे से बनाया गया फंदा काफी ढीला था। परदे का दूसरा सिरा पंखे की राड के बजाय एक ब्लेड के अंदर वाले सिरे में बंधा था। चेहरा बाईं तरफ मुड़ा हुआ था और गर्दन दाहिने कंधे पर टिकी थी।
सीओ सिटी ने बताया कि अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं, वे हत्या करके लाश फंदे पर लटकाने की ओर इशारा कर रहे हैं। अब सबसे पहले मौके पर गए पुलिस कर्मियों के बयान लेना बाकी हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर डॉक्टर की भी राय ली जाएगी। लड़की के पिता की कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्रा की पढ़ाई मार्च में ही पूरी हो चुकी थी, लिहाजा इस घटना के बाद वह दोबारा मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंची।
कहां गया हृदयेश का सुसाइड नोट
मौका-ए-वारदात का मुआयना करने के बाद बारादरी पुलिस ने दावा किया था कि उसने मौके पर हृदयेश गौतम का सुसाइड नोट भी बरामद किया है। हृदयेश के पिता रामप्रसाद कई दिनों तक यह कथित सुसाइड नोट देखने के लिए थाना बारादरी के चक्कर काटते रहे। पुलिस ने उन्हें लगातार टालती रही और सुसाइड नोट नहीं दिखाया। इस सुसाइड नोट का आज तक पता नहीं लग पाया है। पुलिस की तफ्तीश में भी इसका कोई जिक्र नहीं है।