अफसरों ने भी माना, सुरक्षा में कमी
सिटी रिपोर्टर
बरेली। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बरेली जोन में संचालित 457 बसों में अग्निशमन सुरक्षा भगवान भरोेसे है। खास बात यह कि ज्यादातर बसों में अग्निशमन उपकरण लगाए ही नहीं गए हैं। अपवादस्वरूप यदि बसों में उपकरण हैं भी, तो उनकी हालत किसी से छिपी नहीं है। वर्षों पहले लगाए गए ये अग्निशमन उपकरण ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि बस में आग लगने जैसी घटना में काम आ सकें।
रूहेलखंड डिपो के बरेली से हल्द्वानी जा रही बस में देवरनियां के पास दुर्घटना होने केे बाद बस में आग लग जाने व चालक की मौत की घटना ने बसों में अग्निशमन उपायों की कलई खोलकर रख दी है। यदि निगम की बसों में भी अत्याधुनिक बसों की तर्ज पर स्थापित सेंसरयुक्त अग्निशमन उपकरण लगे होते तो संभवत: उसके स्वत: संचालित हो जाने से चालक की जान बच जाती। बरेली जोन में संचालित निगम की 457 बसों की स्थिति पर नजर डालें तो ज्यादातर बसों में अग्निशमन उपकरण हैं ही नहीं। नाम न छापने के अनुरोध के साथ एक अधिकारी ने बताया कि हां, यह सही है कि ज्यादातर बसों में अग्निशमन उपकरण नहीं हैं और न ही चालक-परिचालक को उपकरणों के संचालन की ही जानकारी है। जबकि प्रावधानों पर गौर फरमाएं तो विभागीय चालकों-परिचालकों को बाकायदा इन उपकरणों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। अफसरों का यह भी कहना है कि बजट के अभाव के चलते सभी बसों में अग्नि शमन यंत्रों का लगाना संभव नहीं है।
....बाक्स
निगम की कुछ बसों मेें अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं। लेकिन ये उपकरण इतने कारगर नहीं हैं कि आग की बड़ी घटना को रोक सकेें। इस संबंध में आला अधिकारियों से वार्ता की जाएगी ताकि ज्यादातर बसों में अग्निशमन उपकरण स्थापित करवाए जा सकें। साथ ही हादसों को भी रोका जा सके।
- नीरज अग्रवाल, एआरएम
----
बाक्स
बाजार में उपलब्ध हाइटेक हीट सेंसर युक्त उपकरण
विशेषज्ञों की मानें तो बाजार में ऐसे हाइटेक अग्निशमन उपकरण उपलब्ध हैं जो आग से उत्पन्न लौ और थोड़ी सी गर्माहट महसूस करने के साथ ही स्वत: संचालित हो जाते हैं। यह बात सही है कि ये उपकरण थोड़े महंगे हैं, लेकिन इन्हें लगाने से जानमाल के खतरे से बचा जा सकता है।